रविवार, 10 सितंबर, 2006 को 15:08 GMT तक के समाचार
अनीश अहलूवालिया
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ब्राज़ील और क्यूबा की नौ दिनों की यात्रा पर निकलने से पहले कहा है कि उन्हें अपेक्षा है कि इस यात्रा के दौरान ब्राज़ील से भारत के संबंध और गहरे होंगे.
उन्होंने कहा कि लैटिन अमरीका में ब्राज़ील के साथ हमारे काफ़ी बेहतर ताल्लुकात हैं और आशा जताई कि इस यात्रा के दौरान दोनों ओर के रिश्तों में और मज़बूती लाने के लिए ब्राज़ील की ओर से भी काफ़ी सकारात्मक प्रयास किए जाएंगे.
लैटिन अमरीकी देशों की इस यात्रा के दौरान वो ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला डीसिल्वा से मुलाकात करेंगे. उसके बाद भारत ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं के बीच शिखर बैठक होगी.
इस शिखर वार्ता में व्यापार, जैव इंधन और सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा होगी.
शिखर वार्ता के बाद प्रधानमंत्री गुटनिरपेक्ष देशों के सम्मेलन में भी भाग लेंगे जहाँ उनकी मुलाक़ात पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से भी होगी.
संबंध
लगभग 38 वर्ष पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की यात्रा के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली ब्राज़ील यात्रा है.
पिछले कई वर्षों में व्यापार और कृषि जैसे कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा है और विश्व व्यापार संगठन में पश्चिमी देशों की सब्सिडी के मामले पर दोनों देशों ने मिलकर विकासशील देशों का नेतृत्व किया है.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी यात्रा पर रवाना होने से पहले कहा कि ब्राज़ील कई क्षेत्रों में भारत का एक प्रमुख भागीदार है और वो दोनों देशों के बीच संबंधों को और मज़बूत करने के प्रयास करेंगे.
भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका अपने-अपने महाद्वीपों के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हैं और तीन वर्ष पहले इन तीनों देशों के बीच इस गुट की स्थापना हुई थी.
इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय पटल पर इस गुट को एक नयी शक्ति के रूप में सामने लाना था और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस प्रयास को आगे बढाने के लिए इस यात्रा के दौरान दक्षिण अफ्रीका और ब्राज़ील के साथ त्रिपक्षीय वार्ताओं में भाग लेंगे.
भारत-पाक संबंध
क्यूबा में आयोजित हो रहे गुट निरपेक्ष देशों के शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच मुलाक़ात हो सकती है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दोनों नेता भारत पाकिस्तान शांति प्रक्रिया के महत्व को समझते हैं और शांति प्रक्रिया को आगे ले जाने के बारे में दोनों के बीच बातचीत हो सकती है.
मुंबई बम धमाकों के बाद जब भारत ने पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तर की वार्ताओं को स्थगित किया था तभी से गुट निरपेक्ष शिखर सम्मेलन पर सभी की नज़रें थीं क्योंकि इस दौरान दोनों देशों के नेताओं की मुलाक़ात होनी है.