शनिवार, 09 सितंबर, 2006 को 13:58 GMT तक के समाचार
महाराष्ट्र के मालेगाँव शहर में शुक्रवार को तीन धमाकों में मारे गए लोगों को शनिवार को दफ़ना दिया गया. वहाँ स्थिति सामान्य रही और किसी अप्रिय घटना की ख़बर नहीं थी.
शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, गृह मंत्री शिवराज पाटिल और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने घटनास्थल का दौरा किया था.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कहा, "इस समय सबसे महत्वपूर्ण बात सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना है क्योंकि इन आतंकवादी घटनाओं का मकसद समाज में दरार पैदा करना था."
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने घोषणा की कि पूरे मामले की जाँच केंद के सहयोग से की जाएगी.
अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शॉन मक्कॉर्मेक ने कहा कि अमरीका इस भयानक घटना की निंदा करता है और इसका कोई भी स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सकता.
उधर पाकिस्तान ने भी इस घटना की निंदा की है और प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने उम्मीद जताई की भारत सरकार उन लोगों को सज़ा दिलवाएगी जो इसके लिए ज़िम्मेदार हैं.
लेकिन इस घटना की किसी भी चरमपंथी संगठन ने ज़िम्मेदारी नहीं ली है.
मुस्लिम बहुल शहर
शुक्रवार की नमाज़ के समय हुए धमाकों में कम से कम 37 लोगों के मारे जाने की ख़बरें आई थीं लेकिन महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक पीएस पसरीचा ने शनिवार को बताया कि मृतकों की संख्या 32 है.
जब धमाके हुए उस समय शहर के क़ब्रिस्तान में स्थित एक मस्जिद में जुमे की नमाज़ अदा करने के लिए सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए थे.
ये धमाके मस्जिद में दाख़िल होने और बाहर जाने वाले दरवाज़ों पर हुए थे. शुक्रवार को मुसलमानों का शब-ए-बारात त्यौहार था जिस मौक़े पर वहाँ और ज़्यादा भीड़ थी.
रात भर पुलिस ने शहर में गश्त लगाई. कर्फ़्यू शनिवार सुबह ही हटा लिया गया था और कोई हिंसक प्रतिक्रिया नहीं हुई.
सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील मालेगाँव शहर की आबादी लगभग पाँच लाख है जिसमें क़रीब 75 प्रतिशत लोग मुस्लिम हैं और यह कपड़ा उद्योग के लिए मशहूर है.
विस्फोटों के बाद से ही वहाँ भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल तैनात हैं हालाँकि स्थिति सामान्य बताई गई है.
मुबई से क़रीब 300 किलोमीटर पूर्वोत्तर में स्थित मालेगाँव में हुए इन धमाकों की किसी संगठन ने ज़िम्मेदारी नहीं ली है.
विस्फोटों के लिए साइकिलों का इस्तेमाल किया गया था. वहाँ से बरामद की गई सामग्री फ़ोरेन्सिक जाँच के लिए भेजी गई है.
सामान्य
जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होता नज़र आया और दुकानें सामान्य रूप से खुलीं. सड़कों पर यातायात भी सामान्य रूप से चलता दिखाई दिया.
कप़ड़ा कारोबार में लगे एक व्यक्ति सैयद अहमद असग़र का कहना था, "ज़िंदगी चलनी तो है ही, हालाँकि कल के विस्फोटों के बाद कुछ लोगों की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गई है. लोगों को भूख-प्यास तो लगती ही है और हमें पेट भरने के लिए कामकाज तो करना ही होगा."
एक अन्य व्यक्ति मोहम्मद आरिफ़ अपने आठ वर्षीय बेटे को नमाज़ के लिए मस्जिद लाए थे और क़ब्रिस्तान में अपने पूर्वजों की क़ब्रों पर दुआ मांगने के लिए भी, लेकिन कुछ ही देर बाद आरिफ़ दोबारा आए तो अपने उसी बेटे की लाश दफ़नाने के लिए.
मोहम्मद आरिफ़ बताते हैं, "मैं भी वहाँ था, बस उसके ज़रा सा ही पीछे. हम मस्जिद से निकल रहे थे. मेरा बेटा दरवाज़े के पास पहुँच गया था. बस एक ज़ोरदार धमाका हुआ और वह गिर गया. हम उसे अस्पातल ले गए लेकिन तब तक सब कुछ ख़त्म हो चुका था."
शनिवार को मोहम्मद आरिफ़ जैसे अनेक लोगों ने अपने परिजनों को नम आँखों के साथ दफ़न कर दिया.