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शुक्रवार, 08 सितंबर, 2006 को 17:12 GMT तक के समाचार

सुशील झा
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

मनमोहन-मुशर्रफ़ मुलाक़ात 'क्यूबा में'

क्यूबा में आयोजित हो रहे गुट निरपेक्ष देशों के शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच मुलाक़ात हो सकती है.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दोनों नेता भारत पाकिस्तान शांति प्रक्रिया के महत्व को समझते हैं और शांति प्रक्रिया को आगे ले जाने के बारे में दोनों के बीच बातचीत हो सकती है.

मुंबई बम धमाकों के बाद जब भारत ने पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तर की वार्ताओं को स्थगित किया था तभी से गुट निरपेक्ष शिखर सम्मेलन पर सभी की नज़रें थीं क्योंकि इस दौरान दोनों देशों के नेताओं की मुलाक़ात होती है.

ज़ाहिर था कि प्रधानमंत्री की ब्राजील और गुट निरपेक्ष देशों के सम्मेलन के संबंध में जानकारी देने के लिए शुक्रवार को बुलाई गई प्रेस वार्ता में भी यही सवाल पूछा गया.

इसके जवाब में भारत के विदेश सचिव श्याम सरन का कहना था, "हाँ, मैं यह कह सकता हूँ कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच मुलाक़ात संभव है. दो दिनों का सम्मेलन है. 15 या 16 तारीख़ में से किसी भी दिन दोनों नेता मिल सकते हैं."

मुद्दा

यह पूछे जाने पर कि दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत होनी है और क्या इस मुलाक़ात के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाएंगे, श्याम सरन ने कहा, "मैं ये नहीं कह सकता कि दोनों नेता क्या बात करेंगे. हालांकि ऐसा कहना सही होगा कि दोनों ही नेता भारत और पाकिस्तान के संबंधों की महत्ता को समझते हैं."

"दोनों ही लोग इस शांति प्रक्रिया को आगे ले जाने के इच्छुक हैं. यह बात भी सही है कि जब तक आतंकवाद के मुद्दे के साथ ढंग से निपटा नहीं जाता तब तक शांति प्रक्रिया की सफलता सुनिश्चित करना मुश्किल होगा. मुझे लगता है कि दोनों नेता इसी भाव से बातचीत करेंगे."

विदेश सचिव ने इन आरोपों को ख़ारिज़ किया कि शांति प्रक्रिया खटाई में पड़ गई है.

उनका कहना था कि सिर्फ़ विदेश सचिव वार्ताओं की तारीख़ नहीं दी गई थी. इसके अलावा अन्य सभी स्तरों पर शुरु हुई बार्ताएं अभी भी चल रही हैं और पाकिस्तान के साथ विभिन्न स्तरों पर संपर्क बना हुआ है.

विदेश सचिव स्तर की बातचीत के बारे में बार-बार पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर दोनों नेताओं की बैठक के दौरान संतोषजनक प्रगति होती है और दोनों पक्ष आतंकवाद के ख़तरे को चुनौती मानते हैं तो बात आगे बढ़ सकती है.