गुरुवार, 07 सितंबर, 2006 को 08:12 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर से
राजस्थान में मेडिकल कॉउंसिल ने गुरुवार को कन्या भ्रूण हत्या के आरोपों से घिरे सात डॉक्टरों की प्रेक्टिस पर अगले छह महीने या जाँच पूरी होने तक रोक लगा दी है.
इनमें तीन सरकारी डॉक्टर भी शामिल हैं. महिला संगठनों ने इसका स्वागत किया है.
मेडिकल कॉउंसिल के रजिस्टार संजय शर्मा ने बीबीसी को बताया कि राजस्थान मेडिकल कॉउंसिल को कम से कम 60 डॉक्टरों के विरुद्ध और ऐसी शिकायतें मिली हैं जिसकी जाँच की जा रही है.
कॉउंसिल के मुताबिक उस दौरान ये डॉक्टर प्रसव कार्य और भ्रूण परीक्षण करने वाली अल्ट्रासाउंड मशीनों पर काम नहीं कर सकेंगे. इनमें से चार प्रसूति रोग विशेषज्ञ और तीन रेडियोलॉजिस्ट शामिल हैं.
राजस्थान में भ्रूण हत्या का मामला तीन माह पूर्व तब प्रकाश में आया था जब एक टीवी चैनल ने अपने ख़ुफ़िया कैमरे में बड़ी संख्या में भ्रूण परीक्षण और हत्या को क़ैद कर दिखाया था.
मामला
इस पर महिला संगठनों के अभियान के बाद सरकार ने 21 डॉक्टरों के विरुद्ध पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई और सात डॉक्टरों को निलंबन का आदेश थमा दिया था.
इन डॉक्टरों ने आरोपों को ग़लत बताया है और कहा है कि वे बेगुनाह हैं.
महिला अधिकार कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव कहती हैं कि भ्रूण हत्या रोकने और डॉक्टरों के विरुद्ध कार्रवाई के मामले में सरकारी कार्रवाई की रफ़्तार बहुत धीमी है.
उनका कहना है कि इतना सब होने के बाद भी भ्रूण हत्या की घटनाएँ हो रही हैं. लेकिन स्वास्थ्य मंत्री डॉ दिगंबर सिंह कहते हैं कि सरकार चौकस और चुस्त होकर कार्रवाई कर रही है और दोषी डॉक्टरों को दंडित किया जा रहा है.
सरकारी आश्वासन के बावजूद अजन्मी कन्याएँ मारी जा रही है. पिछले एक माह में उदयपुर की झीलों में पाँच कन्या भ्रूण मृत पाए गए.
राजस्थान में प्रति एक हज़ार मर्दों की तुलना में 922 औरतें हैं जबकि कुछ ज़िलों में यह अनुपात और भी कम है. उल्लेखनीय है कि कन्या भ्रूण का परीक्षण भारत में क़ानूनन जुर्म है.