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मंगलवार, 05 सितंबर, 2006 को 10:20 GMT तक के समाचार

उत्तरी वज़ीरिस्तान में समझौता

पाकिस्तान सरकार और उत्तरी वज़ीरिस्तान में तालेबान समर्थक चरमपंथियों ने इलाक़े में अशांति ख़त्म करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

उत्तरी वज़ीरिस्तान के बुज़ुर्ग क़बायलियों की परिषद जिरगा की पहल पर हुआ यह समझौता अपनी तरह का पहला समझौता है.

इस समझौते के तहत वज़ीरिस्तान के क़बायली अपने यहाँ से सभी विदेशी चरमपंथियों को बाहर निकालेंगे और इस बात को सुनिश्चित किया जाएगा कि सीमापार से हमले न हों.

उत्तरी वज़ीरिस्तान के मीरनशाह कस्बे में एक स्थानीय कॉलेज के फ़ुटबॉल मैदान में एक समारोह हुआ जिसमें इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए.

इस समारोह में स्थानीय प्रशासन के अधिकारी, सेना का कमांडर और चरमपंथियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

जिरगा की मध्यस्थता

इस समझौते में कबायली नेताओं की परिषद ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी और वे भी समझौता होने के वक़्त मौजूद थे.

उत्तरी वज़ीरिस्तान के प्रशासक डॉक्टर इरफ़ान ने सरकार की ओर से हस्ताक्षर किए जबकि चरमपंथियों की ओर से मोहम्मद आज़ाद ने दस्तख़्त किए.

स्थानीय सांसद हाजी नेक ज़माँ ने इस मौके पर कहा कि चरमपंथी सरकारी संस्थानों को निशाना नहीं बनाएँगे और न अफ़ग़ानिस्तान में घुस पाएँगे और साथ ही वे ज़ब्त किए गए हथियार सरकार को दे देंगे.

उनका यह भी कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान आने की अनुमति केवल व्यापार के लिए ही दी जाएगी, हमले करने के लिए नहीं.

वहीं सरकार ने वादा किया है कि वो इलाक़े में और ज़मीनी या हवाई अभियान नहीं चलाएगी और कबीलों को दी जाने वाली सहूलतें फिर से बहाल करेगी.

सरकार ने चरमपंथियों की दो माँगे समझौता होने से पहले ही मान ली थीं.

इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लैट के अनुसार कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस समझौते से सरकार को उस सैन्य नीति से बाहर होने का रास्ता मिल गया है जो आमतौर पर विफल ही रही है.

इसमें उत्तरी वज़ीरिस्तान में नए नाकों से सेना को हटाना और 140 कबायली लोगों को रिहा किया जाना शामिल था. ये समझौता दो महीनों की कोशिशों के बाद हो पाया है.