मंगलवार, 05 सितंबर, 2006 को 07:14 GMT तक के समाचार
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि ख़ुफ़िया एजेंसियों ने धार्मिक स्थलों, आर्थिक और परमाणु प्रतिष्ठानों पर चरमपंथी हमलों की चेतावनी दी है.
देश की आंतरिक सुरक्षा पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि ख़ुफ़िया एजेंसियों ने हिंसा में बढ़ोत्तरी की चेतावनी दी है.
उन्होंने 'बाहर से समर्थन प्राप्त चरमपंथी संगठनों' की देश में बढ़ती गतिविधियों पर चिंता जताई.
ग़ौरतलब है कि दो महीने पहले मुंबई की लोकल ट्रेनों में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे जिनमें 186 लोग मारे गए थे.
भारत ने इन हमलों के पीछे पाकिस्तान समर्थित चरमपंथी गुटों का हाथ होने की बात कही थी. लेकिन पाकिस्तान ने इन आरोपों का खंडन किया था.
आंतरिक सुरक्षा की समस्या
मनमोहन सिंह ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा की समस्या जटिल हो गई है और केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर इसका समाधान ढूंढना है. साथ ही इस मामले में और सहयोग बढ़ाए जाने की ज़रूरत है.
भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर की स्थिति के बारे में मनमोहन सिंह ने कहा,'' हालांकि वहाँ की स्थिति में सुधार के संकेत हैं लेकिन हमें भारत विरोधी और राष्ट्र विरोधी ताकतों से सचेत रहने की ज़रूरत है ताकि वे भावनाओं को न भड़का पाएँ और इसे हिंसा में न तब्दील कर पाएँ.''
उल्लेखनीय है कि भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबलों और चरमपंथियों के बीच 1989 से संघर्ष चल रहा है और इसमें 60 हज़ार से अधिक लोगों की जानें जा चुकीं हैं.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार माओवादी हिंसा से कड़ाई और सुनियोजित तरीके से निबटने के पक्ष में है.
उनका कहना था,'' वामपंथी अतिवादी देश के सबसे पिछड़े इलाक़ों में अपने पैर जमा रहे हैं.''
पिछले 20 वर्षों में माओवादी हिंसा में देश के दक्षिणी और पूर्वी हिस्से में लगभग छह हज़ार लोग मारे जा चुके हैं.
माओवादी आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, बिहार और छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाक़ों में ख़ासतौर से सक्रिय हैं.