सोमवार, 04 सितंबर, 2006 को 13:58 GMT तक के समाचार
आलोक कुमार
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
झारखंड की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार पर अल्पमत में आने का ख़तरा उत्पन्न हो गया है. इस बीच कॉंग्रेस वैकल्पिक सरकार बनाने की फ़िराक में है.
पिछले दो दिनों से दिल्ली में जमे राज्य सरकार के तीन मंत्री एनुस एक्का, मधु कोड़ा और हरिनारायण राय पिछले कुछ दिनों से मुख़्यमंत्री अर्जुन मुंडा के ख़िलाफ़ बयानबाजी करते रहे हैं.
ये तीनों निर्दलीय विधायक हैं और विधानसभा चुनाव के बाद इन्होंने राजग को समर्थन दिया था.
इस बीच झामुमो का कहना है कि उनके नेता शिबू सोरेन मुख्यमंत्री बनने की होड़ से बाहर हैं और वैकल्पिक सरकार बनाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी.
खुद मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने बीबीसी के साथ बातचीत में आरोप लगाया कि कुछ लोग इन विधायकों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "हमारी सरकार अभी बहुमत में है लेकिन कुछ लोग इसे अस्थिर करने का प्रयत्न कर रहे हैं. वे नाकाम होंगे. ऐसी कोशिश बार बार होती रही है. वो जो हथकंडा अपना रहे हैं उसे पूरे देश की जनता देखेगी."
हालाँकि विपक्षी यूपीए के किसी घटक दल को कोसने से परहेज करते हुए उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा, "समय आने पर मैं सब चीजें बताउँगा. अभी मैं किसी को दोष नहीं देना चाहता."
भाजपा के एक स्थानीय नेता ने बीबीसी को बताया कि ये तीनों विधायक कॉंग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मुलाकात कर वैकल्पिक सरकार के गठन के लिए मदद माँग सकते हैं.
ग़ौरतलब है कि 82 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में सरकार को सिर्फ़ 43 विधायकों का समर्थन प्राप्त है जिनमें विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी भी शामिल हैं.
उधर विपक्षी यूपीए के खेमे में 39 विधायक हैं और सरकार का स्थायित्व पूरी तरह उन पाँच निर्दलीय विधायकों पर निर्भर है जो राजग को समर्थन दे रहे हैं.
अग़र पाँच में से तीन निर्दलीय विधायकों ने समर्थन वापस लिया तो मुंडा सरकार अल्पमत में आ जाएगी.
यूपीए की नीति
झारखंड से कॉंग्रेस सांसद और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री सुबोधकांत सहाय ने स्वीकार किया कि ये विधायक यूपीए के संपर्क में हैं.
उन्होंने कहा, "चुनाव के बाद राज्य में हमारी सरकार बनी लेकिन उसे हटा दिया गया. इसके बावजूद हम मौजूदा सरकार के गिरने के लिए ज़िम्मेदार नहीं होंगे. यह सरकार ख़ुद अपने बोझ से गिर जाएगी."
वो कहते हैं, "अगर सरकार गिरी और इन निर्दलीय विधायकों ने हमसे संपर्क किया तो हम निश्चित रुप से वैकल्पिक सरकार बनाने की कोशिश करेंगे क्योंकि हम नहीं चाहते कि राज्य में मध्यावधि चुनाव हो."
राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता और केंद्रीय कोयला मंत्री शिबू सोरेन ने कहा, "अभी स्थिति साफ नहीं है. क्या होगा देखने वाली बात होगी."
वहीं झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता सुधीर महतो ने स्वीकार किया कि तीनों विधायकों का उनसे सीधा संपर्क बना हुआ है. उन्होंने दावा किया कि अगले तीन चार दिनों में मुंडा सरकार का पतन निश्चित है.
सुधीर महतो ने यह भी साफ किया कि उनके नेता शिबू सोरेन मुख्यमंत्री बनने की ज़िद नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "हमारे नेता ने खुद को इस दौड़ से बाहर कर लिया है. इसलिए यह कोई समस्या नहीं है. यूपीए पूरी तरह एकजुट है."
सोमवार शाम ही दिल्ली पहुँचे सुधीर महतो ने कहा कि अगले कुछ दिनों के भीतर यूपीए के शीर्ष नेताओं के साथ झारखंड के राजनैतिक भविष्य पर विचार विमर्श किया जाएगा.
विधानसभा में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) विधायक दल की नेता अन्नपूर्णा देवी ने साफ किया कि सरकार को अस्थिर करने में उनकी पार्टी की कोई भूमिका नहीं है.
साथ ही उन्होंने कहा, "पूरा राज्य भ्रष्टाचार की गिरफ़्त में है और आम नागरिक सुरक्षित नहीं है. ऐसे में सरकार ख़ुद ही गिर जाएगी. जहाँ तक बदलते राजनीतिक घटनाचक्र में हमारी पार्टी का सवाल है तो ये सब काफी उपर के स्तर पर चल रहा है."
सरगर्मी
इस बीच झारखंड की राजधानी राँची में राजनैतिक सरगर्मी तेज़ हो गई है.
राजग के सबसे बड़े घटक दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के आवास पर सुबह से लगातार बैठकें हो रही हैं.
इस बीच राष्ट्रमंडल देशों के पीठासीन अधिकारियों की बैठक में हिस्सा लेने नाइजीरिया जा रहे विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी यात्रा बीच में ही छोड़ राँची लौट आए हैं.
उनकी वापसी इस माएने में अहम है कि एनुस एक्का की विधानसभा सदस्यता ख़त्म करने का मामला उन्हीं के पास है.
उल्लेखनीय है कि एक्का ने झारखंड पार्टी (ग़ैरसूचीबद्ध) की ओर से चुनाव लड़ा था और पार्टी व्हिप की अनदेखी करते हुए उन्होंने राजग को समर्थन दिया था. इसके बाद पार्टी के अध्यक्ष एनई होरो ने विधानसभा अध्यक्ष से उनकी सदस्यता ख़त्म करने की माँग की थी.