शनिवार, 02 सितंबर, 2006 को 21:11 GMT तक के समाचार
महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के स्थानीय प्रशासन ने इस क्षेत्र में किसानों की आत्महत्या के मामलों को नियंत्रित करने के लिए एक नया तरीका खोज निकाला है.
स्थानीय प्रशासन ने तय किया है कि किसानों की आत्महत्या के मामलों में कमी लाने के लिए उन्हें योग सिखाया जाएगा.
इसके लिए किसानों को देशभर में ख़ासा चर्चित रहा योग, आर्ट ऑफ़ लिविंग सिखाया जाएगा. साथ ही कई दूसरे योग भी सिखाए जाएँगे जो कि इस क्षेत्र के किसानों के तनाव को कम करने में मदद करेंगे.
प्रशासन का मानना है कि इस तरह किसानों में सकारात्मक ढंग से सोचने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा.
ग़ौरतलब है कि इस क्षेत्र में कर्ज़ की मार झेल रहे किसानों ने पिछले एक दशक में बड़ी तादाद में आत्महत्याएँ की हैं.
इसी वर्ष जुलाई में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विदर्भ के दौरे के दौरान वहाँ के किसानों के लिए 40 अरब रुपए के पैकेज की घोषणा की थी. लेकिन कई किसानों का कहना है कि उन तक मदद नहीं पहुँची है.
नई बात नहीं
ऐसा नहीं है कि पिछले नौ वर्षों से किसानों की आत्महत्याओं की कहानी कह रहे इस क्षेत्र में प्रशासन ने इससे निपटने के लिए इस तरह का पहला प्रयोग किया है.
इससे पहले भी धार्मिक और आध्यात्मिक उपदेशों आदि की मदद से स्थानीय प्रशासन ने आत्महत्या के मामलों को नियंत्रित करने की कोशिश की है. हालांकि ऐसे प्रयास कितने सफल रहे हैं. इस बारे में कुछ भी साफ़ तौर पर कह पाना ज़रा मुश्किल ही है.
इस क्षेत्र में काम कर रहे कार्यकर्ताओं को भी इस बात का साफ़ अनुमान नहीं है कि इस तरह की कोशिशों से समस्या का किस हद तक समाधान किया जा सकेगा.
हालांकि उन्होंने कहा है कि वो फिर भी इस तरह के प्रयासों का स्वागत करेंगे.
एक आकलन के मुताबिक इस क्षेत्र में जून 2005 से लेकर अबतक 800 से भी ज़्यादा बड़ी तादाद में किसान आत्महत्या कर चुके हैं.
इनमें से क़रीब 100 किसानों ने तो इसी वर्ष अगस्त के महीने में आत्महत्या की है जो कि इस क्षेत्र में पिछले नौ वर्षों के दौरान किसी महीने आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या का सबसे बड़ा आँकड़ा है.