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शनिवार, 02 सितंबर, 2006 को 14:41 GMT तक के समाचार

अनीश अहलूवालिया
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

उपहार त्रासदी की जाँच रिपोर्ट जारी

दिल्ली की सबसे भयानक त्रासदी में गिने जाने वाली उपहार सिनेमा त्रासदी की न्यायिक जांच की रिपोर्ट सार्वजानिक कर दी गई है.

13 जून 1997 में उपहार सिनेमाघर में आग लगने से 59 लोग मारे गए थे 100 से अधिक लोग बुरी तरह घायल हो गए थे. मरने वालों में कई बच्चे भी शामिल थे.

लेकिन यह जाँच रिपोर्ट इस हादसे का शिकार लोगों के लिए न्याय के लंबे इंतज़ार में एक कड़ी मात्र है. उपहार सिनेमा में लगी आग की भयावहता ने शहर को दहला कर रख दिया था.

उस हादसे के लगभग नौ साल बाद भी इस हादसे का शिकार हुए लोगों और उसमे मारे गए लोगों के रिश्तेदारों का न्याय का इंतज़ार है.

दिल्ली के एक सेशंस कोर्ट की न्यायधीश ने उपहार त्रासदी संबंधी अपनी जाँच सार्वजनिक कर दी है और इसकी कॉपियाँ हादसे का शिकार हुए लोगों, उपहार सिनेमा के मालिकों और अभियोजन पक्ष को दे दी गई हैं.

अंतिम फ़ैसला

हादसे का शिकार हुए लोगों की और से मुकदमा लड़ रहे वकील केटीएस तुलसी ने बताया कि सेशन्स कोर्ट की न्यायधीश ममता सहगल ने अपनी रिपोर्ट में क्या कहा है.

उन्होंने बताया, "जज ने पाया कि किस तरह गैंगवे बंद हुआ और सीढ़ियों की और जाने वाला रास्ता बंद हुआ जिसकी वजह से आग लगने के बाद लोग बाहर नहीं निकल पाए."

इस मामले में दिल्ली सरकार के कई अधिकारियों, निर्माता अंसल बंधुओं और उपहार सिनेमा के मालिकों के ख़िलाफ़ सेशंस कोर्ट में मुक़दमा चल रहा है.

उपहार सिनेमा के मालिकों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील के के सरीन कहते हैं कि रिपोर्ट में जज ने कहीं भी किसी को दोषी नहीं ठहराया है.

जाँच रिपोर्ट के बाद अब अंतिम फ़ैसले के बारे में वकील केटीएस तुलसी का कहना है, "इसके बाद जज सभी पक्षों की दलीलें सुनेंगे और उसके बाद ही फ़ैसला सुनाया जाएगा. मगर यह मुक़दमा अब अपने अंतिम चरण में है."