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शुक्रवार, 01 सितंबर, 2006 को 14:10 GMT तक के समाचार

ज़ुबैर अहमद
बीबीसी संवाददाता, मुंबई

अगस्त में आत्महत्या के सर्वाधिक मामले

महाराष्ट्र में गुरुवार से कर्ज़ में डूबे आठ किसानों ने आत्महत्या कर ली है और इस तरह अगस्त में किसानों की आत्महत्या के 110 मामले सामने आए हैं.

नौ साल पहले, जब से किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आने शुरु हुए थे तब से किसी एक महीने ख़ुद अपनी जान लेने के मामलों की ये सबसे अधिक संख्या है.

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसानों की बदहाली और प्रशासन के कथित उदासीन रवैए के कारण आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं.

आत्महत्या के सबसे ज़्यादा मामले विदर्भ के कपास उगाने वाले इलाक़े से रिपोर्ट किए गए हैं. वहाँ किसानों की संख्या लगभग 32 लाख है.

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जुलाई से अपनी जान लेने वाले किसानों की संख्या बढ़ रही है.

'पैकेज का असर नहीं'

महत्वपूर्ण है कि जुलाई में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विदर्भ के दौरे के दौरान वहाँ के किसानों के लिए 40 अरब रुपए के पैकेज की घोषणा की थी. लेकिन कई किसानों का कहना है कि उन तक मदद नहीं पहुँची है.

दो हफ़्ते पहले इस पत्रकार के विदर्भ जाने के बाद से ही लगभग 60 किसान अपनी जान ले चुके हैं.

किसानों के बीच काम करने वाले और कई साल से उनके अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे एक सामाजिक कार्यकर्ता किशोर तिवारी इस स्थिति के लिए किसानों की बदहाली, निराशा और प्रशासन की उदासीनता को दोषी ठहराते हैं.

उस क्षेत्र में लगभग 90 प्रतिशत किसान कर्ज़ में डूबे हुए हैं और उन्हें बैंकों और स्थानीय साहूकारों के पैसे लौटाने हैं.