गुरुवार, 31 अगस्त, 2006 को 16:32 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र ने श्रीलंका सरकार को दी जाने वाली आर्थिक मदद से हाथ खींच लेने की चेतावनी दी है. संघर्षविराम निगरानीकर्ता सहायताकर्मियों की हत्या से नाराज़ हैं.
अंतरराष्ट्रीय समुदाय पिछले दिनों श्रीलंका में फ्रांसीसी स्वयंसेवी संगठन ‘एक्शन अगेंस्ट हंगर’ के सदस्यों की हत्या को लेकर काफ़ी नाराज़ हैं.
कुछ दिन पहले युद्धविराम निगरानीकर्ताओं को इस संगठन के 17 सदस्यों के शव मिले थे.
अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि श्रीलंका में हुए इस नरसंहार के लिए श्रीलंकाई सेना दोषी है. वहीं श्रीलंका सरकार ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया है.
संयुक्त राष्ट्र ने अपने स्वयंसेवी संगठनों को श्रीलंका में काम करने से मना कर दिया है.
स्वीडन, फिनलैंड और डेनमार्क के स्वयंसेवी श्रीलंका छोड़ चुके हैं. ग़ौरतलब है कि श्रीलंका में लंबे समय से सरकार और तमिल विद्रोहियों यानी एलटीटीई के बीच संघर्ष चल रहा है.
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि श्रीलंका सरकार ने अभी तक मारे गए 17 लोगों की हत्या के संबंध में सही कारण नहीं बताए हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने श्रीलंका में लोगों का जीवनस्तर सुधारने के लिए करीब 37.5लाख डॉलर की मदद देने का वादा किया था.
यदि इन स्वयंसेवी संस्था के कार्यकर्ताओं की हत्या के दोषियों को सज़ा नहीं दी गई तो संयुक्त राष्ट्र इस मदद को रोक सकता है.
श्रीलंका पर्यवेक्षक दल के प्रमुख मेजर जनरल उल्फ़ हेनरिक्सन का कहना है, “हमें कुछ सूत्रों से पुख्ता जानकारी मिली है कि इस नरसंहार का मुख्य दोषी कौन है.”
वैसे तो श्रीलंका में फ़रवरी, 2002 से सरकार और एलटीटीई के बीच संघर्ष विराम घोषित है लेकिन पिछले कुछ समय से इनके बीच अघोषित लड़ाई तेज हो गई है.
सात अगस्त को स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं की लाशें भी उसी जगह से बरामद हुई हैं जहां लंबे समय से तमिल विद्रोहियों और सेना के बीच संघर्ष चल रहा था.
हालांकि श्रीलंका सरकार के विदेश मंत्री मगंला समरवीरा ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि श्रीलंका में किसी भी तरह से गृह युद्ध की स्थित नहीं है.