गुरुवार, 31 अगस्त, 2006 को 09:28 GMT तक के समाचार
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि उच्च शैक्षणिक संस्थानों में प्रस्तावित आरक्षण से सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए अवसर कम नहीं होंगे.
प्रधानमंत्री ने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था से पिछड़े वर्गों को सामाजिक रुप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी.
ग़ौरतलब है कि संसद के मॉनसून सत्र में उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण से संबंधित विधेयक पेश किया गया था. इस पर संसद की स्थाई समिति विचार कर रही है.
गुरुवार को दिल्ली के एक महिला कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में डॉ मनमोहन सिंह ने कहा, "इस मुद्दे पर हम दो तरीकों से आगे बढ़ रहे हैं. सबसे पहले तो हमें ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए जिससे पिछड़े वर्गों से इतर अन्य बच्चों के लिए शिक्षा के अवसर घट जाएँ."
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य पिछड़े वर्ग के छात्रों को 'सशक्तिकरण के लिए वाजिब अवसर' प्रदान करना है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी पिछड़े समुदाय के सिर्फ़ 10 फ़ीसदी छात्र ही कॉलेज स्तर की पढ़ाई कर पाते हैं.
उन्होंने कहा कि आरक्षण के मामले में आर्थिक मानकों की भी भूमिका है.
संसद की स्थाई समिति के विचाराधीन विधेयक के तहत आईआईटी और आईआईएम जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षण का प्रावधान होगा. इसमें अन्य पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत तक के आरक्षण की व्यवस्था है.
दायरा बढ़ेगा
इस बीच मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने कल पत्रकारों से कहा कि केंद्र सरकार ग़ैरसहायता प्राप्त संस्थानों में भी पिछड़ी जातियों के आरक्षण के लिए एक विधेयक लाने की योजना बना रही है.
उन्होंने कहा,'' यथा समय एक और विधेयक लाया जाएगा और आप इस बारे में जान जाएंगे.''
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले जब मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह ने केंद्र सरकार की सहायता से चलने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों में पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण की बात कही थी तो काफ़ी हंगामा हुआ था.