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सोमवार, 28 अगस्त, 2006 को 09:24 GMT तक के समाचार

पूर्व लश्कर प्रमुख को रिहा करने के आदेश

पाकिस्तान में लाहौर हाईकोर्ट ने चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा के पूर्व प्रमुख और सामाजिक-धार्मिक संगठन जमात-उद-दावा के नेता हाफ़िज मोहम्मद सईद को रिहा करने के आदेश दिए हैं.

अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने का अंदेशा जताते हुए लगभग 20 दिनों पहले सईद को उन्हीं के घर में हिरासत में ले लिया था.

उनकी पत्नी मैमूना सईद ने इस कार्रवाई के ख़िलाफ़ अदालत में संवैधानिक याचिक दायर की थी.

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सोमवार को लाहौर हाई कोर्ट के न्यायाधीश मोहम्मद अख़्तर शब्बीर ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया.

आदेश में कहा गया है कि पंजाब सरकार सईद को 30 दिनों तक हिरासत में रखने के पक्ष में ठोस सबूत पेश करने में विफल रही.

पंजाब सरकार ने नौ अगस्त को उन्हें उनके आवास में नज़रबंद रखने का आदेश दिया था. बाद में 24 अगस्त को सईद को शेख़पुरा के एक सरकारी अतिथि गृह (गेस्ट हाउस) में स्थानांतरित कर दिया गया.

सरकारी पक्ष की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सईद छह सितंबर को पाकिस्तान रक्षा दिवस के अवसर पर कोई रैली आयोजित कर सकते थे. इसी के मद्देनज़र उन्हें हिरासत में लिया गया.

भारत के साथ 1965 की लड़ाई की याद में पाकिस्तान में हर वर्ष छह सितंबर को रक्षा दिवस मनाया जाता है.

पृष्ठभूमि

सईद पाँच साल पहले तक चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा के मुखिया थे.

उस समय पाकिस्तान सरकार ने लश्करे तैबा को प्रतिबंधित कर दिया तो उन्होंने जमात-उद-दावा नाम से नया संगठन खड़ा कर लिया.

अमरीका जमात-उद-दावा को प्रतिबंधित कर चुका है. उसका मानना है कि इस संगठन का काम लश्करे तैबा के लिए धन इकठ्ठा करना है और दोनों संगठनों के संबंध दुनिया के कई चरमपंथी संगठनों से हैं.

भारत का भी आरोप है कि यह चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा का ही अभिन्न हिस्सा है और मुंबई की रेलगाड़ियों में जुलाई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में भी लश्करे तैबा का ही हाथ था.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार ने लश्करे तैबा को तो प्रतिबंधित कर दिया है लेकिन यह प्रतिबंध जमात-उद-दावा पर लागू नहीं होता है.