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मंगलवार, 29 अगस्त, 2006 को 00:11 GMT तक के समाचार

आलोक प्रकाश पुतुल
बिलासपुर

उड़ीसा छोड़ना पड़ेगा बुधिया को?

साढ़े चार साल के चर्चित और विवादित मैराथन धावक बुधिया सिंह के कोच बिरंची दास उड़ीसा सरकार से बेहद नाराज़ हैं. उनका कहना है कि उड़ीसा सरकार उन्हें नए-नए तरीके से परेशान कर रही है.

बिरंची दास ने छत्तीसगढ़ सरकार से भूखंड उपलब्ध कराने की माँग की है जहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक एथलेटिक्स प्रशिक्षण केंद्र बनाया जा सके.

बिरंची दास इन दिनों बुधिया सिंह के साथ छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं, जहां मंगलवार को खेल दिवस पर बुधिया सिंह को छत्तीसगढ़ सरकार सम्मानित करने वाली है.

बुधिया सिंह ने कुछ ही दिन पहले पुरी से भुवनेश्वर की 65 किलोमीटर की दूरी सात घंटे में तय कर लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया था.

इसके बाद से उड़ीसा सरकार ने बुधिया सिंह के लंबी दूरी तक दौड़ने पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है. कई मानवाधिकार संस्थाओं ने भी बुधिया सिंह को इस तरह दौड़ाए जाने पर आपत्ति दर्ज़ कराई थी.

हालाँकि उड़ीसा में सरकारी विवादों के बाद छत्तीसगढ़ सरकार के खेल एवं पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने बुधिया को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से पूरी मदद देने का आश्वासन दिया था.

कुछ संस्थाओं ने राज्य में हस्ताक्षर अभियान चला कर बुधिया सिंह को छत्तीसगढ़ में बसने का निमंत्रण भी दिया था.

आर्थिक मदद नहीं

बिरंची दास कहते हैं- “उड़ीसा सरकार ने मुझे इतना परेशान कर दिया है कि मुझे अपना प्रशिक्षण केंद्र चलाने में असुविधा हो रही है, जहां 200 से अधिक अनाथ और बेसहारा बच्चे रहते हैं. इनमें से कई बच्चे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना जलवा दिखा चुके हैं.”

बिरंची दास का आरोप है कि उड़ीसा सरकार उनके टैक्सी चालन के निजी व्यवसाय को भी ठप्प करने के लिए तरह-तरह के उपक्रम लगातार कर रही है.

उनके आय के स्रोत को बंद करने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके सहारे उनका प्रशिक्षण केंद्र चलता है.

आर्थिक मदद के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बुधिया सिंह को जितनी बार पैसे देने की घोषणा की गई है, उसके अनुसार उन्हें अब तक कम से कम दो करोड़ रुपए मिल जाने चाहिए थे. लेकिन सरकारी वादे कभी पूरे नहीं हुए.

उन्होंने कहा कि अगर छत्तीसगढ़ सरकार उनकी मदद करना चाहती है तो सरकार उन्हें भूखंड उपलब्ध कराए. हालांकि उन्होंने साफ किया कि फिलहाल उड़ीसा छोड़कर छतीसगढ़ या किसी दूसरे राज्य में बसने का निर्णय फ़िलहाल उन्होंने नहीं लिया है.

अब फ़िल्में भी

16 साल की उम्र में बुधिया सिंह को ओलंपिक में हिस्सा दिलाने का सपना देखने वाले बिरंची दास के अनुसार बॉलीवुड और हॉलीवुड की तीन फ़िल्मों के प्रस्ताव भी बुधिया के पास हैं.

जिनमें से एक सितंबर महीने में शुरु होने वाली है.

भारत समेत दूसरे देशों के आठ फ़िल्मकारों ने बुधिया पर वृत्तचित्र बनाए हैं और बुधिया ने अब तक दो उड़िया म्यूज़िक एलबम में अभिनय किया है.

बिरंची दास बताते हैं- “फ़िल्में बुधिया का लक्ष्य नहीं हैं और इन फ़िल्मों में मेरी या बुधिया की भूमिका बेहद संक्षिप्त होगी. हमने फ़िल्मों के सभी प्रस्ताव पर यह साफ कर दिया है कि उन्हें अभिनय के लिए कोई और कलाकार ढूँढना होगा.”

यानी नज़र अभी भी दौड़ पर है.