शुक्रवार, 25 अगस्त, 2006 को 10:41 GMT तक के समाचार
सुशील कुमार झा
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों ने अपना आंदोलन अगले कुछ महीनों के लिए रोकने की घोषणा कर दी है.
एम्स रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता अनिल शर्मा ने कहा, "हम आंदोलन कुछ दिनों के लिए रोक रहे हैं क्योंकि विधेयक अब संसद की स्थायी समिति के पास है. हम अगले कुछ दिनों तक इस विधेयक को लेकर लोगों के बीच जाएँगे और अपनी बात रखेंगे."
उधर जस्टिस पार्टी के नेता उदित राज का कहना था कि सरकार संसद में आधा अधूरा विधेयक लेकर आई है और 93 वें संशोधन के तहत उन संस्थानों में आरक्षण दिया जाना चाहिए जो गैर सरकारी हैं.
आरक्षण समर्थक दलित डॉक्टर सुरेन्दर तोमर आर्य का कहना था, "आज हमें कोटा मिल रहा तो उच्च जाति के डॉक्टरों को बुरा लग रहा है. हम पिछले 60 साल से यातना झेल रहे हैं. ये तो कोई बात नहीं कि राजा का बेटा ही राजा बनेगा."
उधर आरक्षण का विरोध कर रहे जेएनयू के एक उच्च जाति के छात्र गोपाल जी गोपाल का कहना था कि आरक्षण के ज़रिए उच्च जाति के लोगों के साथ अन्याय किया जा रहा है.
उनका कहना था कि ब्राह्णण भी अब ग़रीब हो चुके हैं और झुग्गियों में रहने को मजबूर हैं क्या उन्हें आरक्षण नहीं मिलना चाहिए.
आने वाले दिनों में जब तक यह विधेयक पारित नहीं होता, बहस चलती रहेगी. सवाल कई होंगे आरक्षण किसे दिया, क्यों दिया जाए और आखिरकार किस आधार पर दिया जाए.