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शुक्रवार, 25 अगस्त, 2006 को 16:09 GMT तक के समाचार

गीता पांडे
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

'क्यों नहीं टाला जा सका कनिष्क कांड?...'

एयर इंडिया के कनिष्क विमान बम कांड में मारे गए भारतीयों के परिजन पूछ रहे हैं कि जब कनाडा सरकार को पहले से ऐसी घटना के बारे में आशंका थी तो इसे रोकने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए गए.

इन दिनों कनाडा के वकील रिचर्ड क्वांस भारत में इस दुर्घटना से प्रभावित हुए परिवारों से मिल रहे हैं और उन्हें जाँच में सहयोग करने के लिए कनाडा चलने के लिए राज़ी करने का प्रयास कर रहे हैं.

रिचर्ड क्वांस ने बीबीसी को बताया कि दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजन पूछ रहे हैं कि जाँच में कहाँ चूक हो गई.

गौरतलब है कि 23 जून 1985 को एयर इंडिया की उड़ान संख्या 182 जब कनाडा से भारत लौट रही थी तो आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर उसमें एक भयंकर बम विस्फोट हुआ.

इस हादसे में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी.

क्या हुआ हासिल?

इस मामले में आरोपी बनाए गए कनाडा के नागरिक रिपुदमन सिंह मलिक और अजायब सिंह बागड़ी को काफ़ी लंबे चले मुक़दमे के बाद मार्च 2005 में बरी कर दिया गया था.

दिल्ली और मुंबई में इस परिजनों से मिल रहे क्वांस कहते हैं कि दोनों को बरी किए जाने के फ़ैसले से परिजन हताश हैं और ढेरों प्रश्न उठा रहे है.

इन लोगों को बरी किए जाने से प्रभावित परिवारों ने भारी नाराज़गी जताई थी और माँग की थी कि यह जाँच कराई जाए कि इतने लंबे और महंगे मुक़दमे से आख़िर क्या हासिल हुआ. इसके बाद कनाडा सरकार ने जाँच की समीक्षा के आदेश दिए थे.

कनाडा सरकार के अनुसार, "नई जाँच का उद्देश्य कुछ नए सबक लेना है, मसलन ग़लती कहाँ हुई और भविष्य में इस तरह की आतंकवाद की कार्रवाई को कैसे रोका जाए."

जाँच के तहत 25 सितंबर से शुरू हो रही सुनवाई में गवाहों और परिजनों की गवाही दर्ज की जाएगी.