गुरुवार, 24 अगस्त, 2006 को 01:59 GMT तक के समाचार
केंद्रीय मंत्रिमंडल के उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षण को मंज़ूरी दिए जाने के फ़ैसले के विरोध में दिल्ली के मेडिकल छात्र गुरुवार को सामूहिक अवकाश पर हैं.
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थाम ( एम्स), मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल के रेज़ीडेंट डॉक्टरों ने भी गुरुवार को एक दिन के सामूहिक अवकाश पर रहने की घोषणा की है.
रेज़ीडेंट डॉक्टरों के अवकाश पर होने के कारण अस्पतालों के कार्य पर असर पड़ सकता है.
आरक्षण विरोध के लिए गठित संगठन 'यूथ फॉर इक्वलिटी' की डॉक्टर नेहा गामी ने बीबीसी को बताया कि दिल्ली के सारे जूनियर डॉक्टर अवकाश पर रहेंगे. लेकिन आपात सेवाओं को इससे अलग रखा गया है.
इसके पहले बुधवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( एम्स) के मेडिकल छात्रों ने काला दिवस मनाया.
मेडिकल छात्रों ने सरकार के फ़ैसले के विरोध में मंगलवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन भी किया था. इस दौरान उनकी पुलिस से झड़प भी हुई थी और पुलिस ने उन आँसू गैस के गोले दागे थे.
विधेयक
ग़ौरतलब है कि सोमवार को मंत्रिमंडल ने उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण से संबंधित विधेयक के मसौदे को मंज़ूरी दे दी थी.
यह विधेयक संसद के समक्ष इसी सत्र में लाया जाएगा. सूचना और प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने जानकारी दी थी कि विधेयक संसद में 25 अगस्त तक लाया जा सकता है.
इस विधेयक के तहत आईआईटी और आईआईएम जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षण का प्रावधान होगा.
माना जा रहा है कि इसमें अन्य पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत तक के आरक्षण का प्रावधान हो सकता है और आरक्षण एक ही बार में नहीं बल्कि विभिन्न चरणों में होगा.
उल्लेखनीय है कि इस मामले में वीरप्पा मोइली समिति अपनी अंतरिम रिपोर्ट पहले ही पेश कर चुकी है.
कुछ समय पहले जब मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह ने केंद्र सरकार की सहायता से चलने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों में पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण की बात कही थी तो काफ़ी हंगामा हुआ था.
इसके विरोध में दिल्ली और कई शहरों के मेडिकल छात्र और डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे.