बुधवार, 23 अगस्त, 2006 को 20:54 GMT तक के समाचार
फ़ैसल मोहम्मद अली
तुलसीपुर से
मध्य प्रदेश के सागर ज़िले में एक महिला के 'सती' होने की घटना के न्यायिक जाँच के आदेश दे दिए गए हैं.
इसी बीच राष्ट्रीय महिला आयोग ने राज्य सरकार से इस मामले पर एक सप्ताह के भीतर पूरी रिपोर्ट तलब की है.
राज्य महिला आयोग भी अपना दो सदस्यीय दल तुलसीपुर गाँव भेज रहा है, जहां जनकरानी नाम की एक आदिवासी महिला ने अपने पति की जलती चिता पर कूद कर जान दे दी थी.
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेशम चौहान कहती हैं, "यह तय करना भी ज़रूरी है कि कहीं यह क़दम उठाने के लिए उसे किसी ने प्रेरित किया या उसपर दवाब डाला गया जो कानूनन एक अपराध है."
एक तरफ़ जाँच चल रही है, वहीं दूसरी ओर तुलसीपार में दर्शनार्थियों की संख्या भी बढ़ रही है. कुछ तो जंगल पार के गाँवों से यहाँ तक आने के लिये 500 रूपये तक ख़र्च कर रहे हैं जबकि दोंनो गाँवों में सिर्फ़ 10-12 किलोमीटर की दूरी है.
तमाशा
इन दर्शनार्थियों में कुछ साधु भी हैं. गेरूए वस्त्र और लंबी जटाओं के साथ. 150 किलोमीटर दूर देवोरी कस्बे से आए कुछ लोग चिता की राख के बीच पड़ी लाल साड़ी के टुकड़ों और चूड़ियों को छूने की कोशिश करते हैं और फिर पास खड़ी पुलिस को देखकर रूक जाते हैं.
सबसे बड़े पुत्र राम अवतार का कहना है कि जनकरानी अपनी बहू से झूठा बहाना बनाकर 'सती' होने के लिए घर से निकली थी.
राम अवतार कहते हैं, "तब हम सबलोग पिताजी का अंतिम संस्कार करके नदी में नहाने गए थे. घर आकर पता चला कि माँ बाहर गई है. कुछ देर बाद हमलोग उसे ढूँढने गए तो वह जलकर राख हो गई थी."
प्रशासन और पुलिस का तर्क है कि यह घटना 'सती' का नहीं है क्योंकि न तो घटना के समय गाँव के अन्य लोग वहाँ मौजूद थे और न ही जनकरानी को दुल्हन की तरह सजाया संवारा गया था.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि यह मामला सती का नहीं बल्कि आत्मदाह का है क्योंकि आत्मदाह करने वाली महिला आदिवासी थी जिनके बीच ऐसी प्रथा कभी नहीं रही.
स्थानीय नेता हर्ष यादव कहते है कि ऐसी घटनाओं की घोर निंदा की जानी चाहिए जो कि समाज पर एक कलंक के समान है लेकिन वह साथ में यह भी कहते हैं कि बीते वर्षों में आदिवासियों के सामाजिक और धार्मिक रीति रिवाजों में काफ़ी फ़र्क आया है.