मंगलवार, 22 अगस्त, 2006 को 01:58 GMT तक के समाचार
केंद्रीय मंत्रिमंडल के उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षण को मंज़ूरी दिए जाने के फ़ैसले को मेडिकल छात्रों ने 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया है और इसके विरोध में दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दिया है.
मेडिकल छात्रों के धरने प्रदर्शन के दौरान के लिए पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए थे और उन्हें तितर बितर करने के लिए आँसू गैस के गोले दागे गए.
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के रेसीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के डॉक्टर अरनब पाल ने सोमवार को ही घोषणा कर दी थी कि हम सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ विरोध व्यक्त करेंगे.
ग़ौरतलब है कि सोमवार को मंत्रिमंडल ने उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण से संबंधित विधेयक के मसौदे को मंज़ूरी दे दी थी.
यह विधेयक संसद के समक्ष इसी सत्र में लाया जाएगा.
इस विधेयक के तहत आईआईटी और आईआईएम जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षण का प्रावधान होगा.
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने इसके बारे में जानकारी दी लेकिन उन्होंने विस्तार से इस विधेयक के प्रावधानों बताने से इनकार कर दिया.
उनका कहना था कि विधेयक संसद में 25 अगस्त को लाया जाना है और सदन के विशेषाधिकार के कारण वो इसका विस्तृत ब्योरा नहीं दे पाएँगे.
समाचार एजेंसियों के अनुसार ये माना जा रहा है कि इसमें अन्य पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत तक के आरक्षण का प्रावधान हो सकता है और आरक्षण एक ही बार में नहीं बल्कि विभिन्न चरणों में होगा.
उल्लेखनीय है कि इस मामले में वीरप्पा मोइली समिति अपनी अंतरिम रिपोर्ट पहले ही पेश कर चुकी है.
कुछ समय पहले जब मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह ने केंद्र सरकार की सहायता से चलने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों में पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण की बात कही थी तो काफ़ी हंगामा हुआ था.
इसके विरोध में दिल्ली और कई शहरों के मेडिकल छात्र और डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे.