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मंगलवार, 22 अगस्त, 2006 को 00:11 GMT तक के समाचार

एलआर जगदीशन
बीबीसी संवाददाता, चेन्नई

ऑटो-रिक्शा की एक अलग सी रेस

अमरीका, ब्रिटेन, हंगरी और रूस समेत दुनिया भर से 16 टीमें तमिलनाडु में एक ऑटो-रिक्शा रेस में भाग ले रही हैं.

इस 'इंडियन ऑटो-रिक्शा चैलेंज' में भाग ले रही 16 टीमों में 50 लोग हैं. इसमें दो टीमें भारत से भी हैं.

एक हज़ार किलोमीटर की यह रेस चेन्नई से सोमवार को शुरु हुई और 27 अगस्त को कन्याकुमारी में ख़त्म होगी.

रंग-बिरंगे ऑटो-रिक्शा को इन टीमों ने तरह-तरह से सजाया गया है. महत्वपूर्ण यह है कि रेस केवल मजे के लिए हैं, इसे जीतने पर कोई पुरस्कार नहीं दिया जाएगा.

रेस में भाग लेने वाले विदेशी लोगों में से अधिकतर ने पहले न तो ऑटो देखा था और न ही उसकी सवारी की थी.

हंगरी के स्ज़ाबो गैल आंद्रास कहते हैं, "ऑटो में अनजानी सड़कों पर एक हज़ार किलोमीटर चलना एक साहसिक कार्य है. ऐसा अनुभव और कहीं नहीं मिल सकता. कोई ट्रेवल एजेंसी ऐसी यात्रा नहीं करवा सकती."

इंग्लैंड की कैथरीन ईवेंस भी इस बात से पूरी तरह सहमत हैं. वे और उनके छह अन्य दोस्त इस यात्रा में शामिल हुए हैं.

हिस्सेदारी

भाग लेने वाली हर टीम ने इसमें हिस्सेदारी के लिए 1.5 लाख रुपए की फ़ीस दी है.

आयोजकों ने उन्हें ऑटो-रिक्शा दिए हैं और पूरे रास्ते उनका साथ देने के साथ-साथ ऑटो-रिक्शा ख़राब हो जाने पर उसकी मरम्मत करने की ज़िम्मेदारी भी उठाई है.

रेस के बाद ऑटो-रिक्शा बेच दिए जाएँगे और उससे मिलने वाला पैसा राहत संस्थाओं को दे दिया जाएगा.

आयोजक अराविंद कुमार कहते हैं कि इस रेस के ज़रिए ये लोग तमिलनाडु की सबसे बेहतरीन जगहों से गुज़रेंगे.

उनका कहना है, "भाग लेने वाले लोग बारिश, भीड़, तरह-तरह की सड़कों और विभिन्न बाधाओं को पार करेंगे."