रविवार, 20 अगस्त, 2006 को 10:05 GMT तक के समाचार
नॉर्वे के एक वरिष्ठ राजनयिक का कहना है कि यूरोपीय संघ के तमिल विद्रोहियों को 'आतंकवादी' ठहराने से श्रीलंका में शांति प्रयासों को झटका लगा है.
ग़ौरतलब है कि यूरोपीय संघ यानी ईयू ने इसी वर्ष मई में एलटीटीई को आतंकवादी संगठनों की सूची में डाल दिया था.
श्रीलंका में शांति बहाली की कोशिशों में लगे नॉर्वे के राजनियक जॉन हानसेन बाउर ने बीबीसी से कहा कि ईयू के इस फ़ैसले से श्रीलंका सरकार और एलटीटीई के बीच दोबारा बातचीत शुरू करने की कोशिशों को धक्का लगा है.
उन्होंने कहा कि इससे तमिल विद्रोहियों का रुख़ और अड़ियल हो गया है. उनके मुताबिक़ एलटीटीई अब ईयू देशों के सभी शांति निरीक्षकों को श्रीलंका से हटने पर ज़ोर दे रहा है.
श्रीलंका सरकार और एलटीटीई के बीच वर्ष 2002 में संघर्षविराम घोषित हुआ था. युद्धविराम समझौता पिछले एक महीने से अधिक समय से चल रहे संघर्ष के बावजूद लागू है.
इस बीच सहायता एजेंसियों ने कहा है कि जाफ़ना प्रायद्वीप में शुरु हुई लड़ाई के कारण वहाँ हज़ारों नागरिक फँसे हुए हैं और उन तक राहत सामग्री पहुँचाने में दिक्कतें आ रही हैं.
संघर्ष
श्रीलंका की सेना ने कहा है कि वह जाफ़ना में विद्रोहियों के हमले का मुँहतोड़ जवाब दे रही है.
एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया कि पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही लड़ाई में कम से कम दस जवान मारे गए हैं और 120 से ज़्यादा घायल हुए हैं. उन्होंने 80 तमिल विद्रोहियों के मारे जाने का भा दावा किया.
इस बीच संयुक्त राष्ट्र के आकलन के मुताबिक ताज़ा लड़ाई के बाद जाफ़ना में लगभग 40 हज़ार लोग बेघर हो गए हैं.
शनिवार को जाफ़ना में लागू कर्फ़्यू में थोड़ी देर के लिए ढ़ील दी गई. इस दौरान दुकानों पर ज़रुरी रसद सामान ख़रीदने के लिए लंबी कतारें देखी गईं.
लड़ाई के कारण रास्ते बंद होने से अब जाफ़ना में सामानों की किल्लत हो रही है और कीमतें भी बढ़ रही है.