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रविवार, 20 अगस्त, 2006 को 14:39 GMT तक के समाचार

निकोलस रोका
बीबीसी न्यूज़

अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ती हिंसा की वजह

अफ़ग़ानिस्तान के हालात पिछले कुछ महीनों में तेज़ी से बिगड़े हैं. इस साल सैंकड़ो लोग मारे जा चुके हैं. ज़्यादातर हिंसा देश के दक्षिणी हिस्सों में हुई हैं.

सरकार हिंसा की ताज़ा लहर के लिए अफ़ग़ानिस्तान के दुश्मनों को दोष देती है. इन दुश्मनों से आशय तालेबान और उनके अल-क़ायदा से जुड़े सहयोगियों से है.

ग़ौरतलब है कि तालेबान 2001 में सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद से ही चरमपंथी गतिविधियों में लगा हुआ है.

अफ़ग़ानिस्तान के पाकिस्तानी सीमा से लगने वाले इलाक़ों को तालेबान का गढ़ माना जाता है. यही इलाक़ा अफ़ीम उत्पादन का प्रमुख केंद्र भी माना जाता है.

लेकिन इन इलाक़ों में तालेबान के हमलों के अलावा अन्य गुटों के हमले भी होते हैं.

इन हमलों में शामिल हैं- तालेबान जैसे अन्य कट्टरपंथी इस्लामी गुट, अफ़ीम की खेती पर रोक लगने की आशंका से चिंतित लोग और वैसे क़बायली नेता जो समझते हैं कि राष्ट्रपति हामिद करज़ई की सरकार ने उन्हें हाशिये पर डाल दिया है.

सहयोग

करज़ई की सरकार को तालेबान और शासनविरोधी अन्य गुटों के ख़िलाफ़ कार्रवाई में अमरीका की अगुआई वाले बहुराष्ट्रीय बल और नैटो बल का सहयोग प्राप्त है.

इन अंतरराष्ट्रीय बलों को अफ़ग़ानिस्तान सरकार के नियंत्रण से बाहर माने जाने वाले इलाक़ों में पुनर्निर्माण और सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन हाल के दिनों में उन्हें भीषण लड़ाइयों का भी सामना करना पडा है.

तालेबान विद्रोहियों के ख़िलाफ़ नैटो और अफ़ग़ान बलों ने ताज़ा कार्रवाई कंधार के पास पंजवई ज़िले में की है. नैटो के एक प्रवक्ता के अनुसार विद्रोहियों को भारी नुक़सान उठाना पडा है.

लड़ाई के बारे में कंधार में नैटो के सुरक्षा प्रमुख कर्नल क्रिस वेरनन ने कहा- "पिछली रात के पिछले पहर में नैटो और अफ़ग़ान सुरक्षा बलों की तालेबान से ज़ोरदार भिड़ंत हुई है. लड़ाई आज सुबह तक चली. अफ़ग़ान अधिकारियों ने तालेबान के 60 से 70 चरमपंथियों के मारे जाने की ख़बर दी है. अभियान के स्तर को देखते हुए हमें इस आंकड़े पर यक़ीन नहीं -करने का कोई कारण नहीं दिखता."

कंधार के पास शनिवार देर रात हुई इस भिड़ंत में नैटो बलों ने तोपों और विमानों का भी उपयोग किया. लड़ाई में चार अफ़ग़ान सुरक्षाकर्मी भी मारे गए हैं.