शुक्रवार, 18 अगस्त, 2006 को 23:08 GMT तक के समाचार
बांग्लादेश के एक जाने-माने कवि शमसुर रहमान की अंत्येष्टि पर ढाका में लगभग पाँच हज़ार लोग एकत्र हुए. रहमान का गुरुवार को निधन हो गया था.
वे लगभग एक सप्ताह तक कोमा में थे और उनका अंत गुर्दे और जिगर के काम न करने के कारण हुआ.
उन्होंने 60 काव्य पुस्तकें लिखी थीं और वे राजनीतिक और सामाजिक न्याय के पक्षधर के रूप में जाने जाते थे जिसके लिए उदारवादियों में उन्हें काफ़ी सम्मान भी हासिल था.
ढाका में उन्हें उनकी माता की कब्र के साथ ही दफ़न किया गया.
रहमान के शव को शुक्रवार सुबह शहीद मीनार ले जाया गया जहाँ आम जनता और नेताओं ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए.
लगभग तीस साल तक वे साहित्य की दुनिया की प्रमुख हस्ती रहे और उनकी रचनाओं को भारत में सराहा गया.
उन्होंने 18 वर्ष की आयु में कविताएँ लिखना शुरु किया था जिसके बाद उनका पत्रकारिता का सफ़र शुरु हुआ और वे दैनिक बांग्ला के संपादक बने.
वे पहले तो कल्पित-कथा के लिए जाने जाते थे लेकिन 1958 में बांग्लादेश में सैन्य शासन आने के बाद वे राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर लिखने लगे.
उनके धर्मनिरपेक्ष विचारों के लिए वर्ष 1999 में उन पर संदिग्ध इस्लामी कट्टरपंथियों ने जानलेवा हमला किया था.