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शुक्रवार, 18 अगस्त, 2006 को 15:33 GMT तक के समाचार

हज़ारों लोग राहत सामग्री के मोहताज

सरकारी सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच चल रही भारी लड़ाई के बीच उन हज़ारों लोगों के बारे में चिंता व्यक्त की जा रही है जो संघर्ष के कारण देश के उत्तरी इलाक़े में फँस गए हैं.

राहत एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि एक सप्ताह से चल रही लड़ाई के कारण उत्तरी जाफ़ना प्रायद्वीप देश के दूसरे हिस्सों से कट गया है और इस कारण राहत सामग्री पहुँचाने में मुश्किल आ रही है.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ जाफ़ना में खाद्य सामग्री और पानी की आपूर्ति इस समय काफ़ी नीचे पहुँच गई है. हालाँकि श्रीलंका की सरकार ने थोड़े समय के लिए दक्षिणी जाफ़ना के कुछ हिस्सों को खोला था ताकि राहत सामग्री पहुँचाई जा सके.

जाफ़ना में स्थानीय अधिकारियों ने सरकार से कहा है कि वे पाँच हज़ार टन खाद्य सामग्री उपलब्ध कराए. श्रीलंका की सरकार ने कहा है कि वह 80 टन खाद्य सामग्री भेजेगी.

लेकिन बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि सैनिकों ने इलाक़ों में अवरोध लगाए हैं और कई इलाक़ों में कर्फ़्यू लगा हुआ है. इस स्थिति में कैसे वहाँ राहत सामग्री भेजी जा सकेगी, यह देखना होगा.

लड़ाई जारी

उत्तरी श्रीलंका में अभी भी लड़ाई जारी है और संघर्ष में कम से कम 100 सैनिक मारे गए हैं. लेकिन ये नहीं पता चल पाया है कि लड़ाई में कितने तमिल विद्रोही मारे गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग के एक अधिकारी जेनिफ़र पैगोनिस ने बताया है कि उत्तरी जाफ़ना प्रायद्वीप की ओर जाने वाली प्रमुख सड़क बंद हो गई है.

उन्होंने बताया, "हम श्रीलंका सरकार औत तमिल विद्रोहियों से ये अपील करते हैं कि वह मानवीय कार्यों के लिए राहतकर्मियों को आने-जाने दे."

तमिल नेशनल एलांयस पार्टी के एक सांसद शिवनाथन किशोर ने उत्तरी जाफ़ना प्रायद्वीप में राहत सामग्रियों की कमी की बात स्वीकार की.

इस इलाक़े में पाँच लाख से ज़्यादा लोग 22 घंटे के कर्फ़्यू के बीच रह रहे हैं. इस बीच एलटीटीई ने उन 51 स्कूल बच्चों के नाम जारी किए हैं जिनके बारे में उसने दावा किया है कि वे सेना की हवाई बमबारी में मारे गए हैं.

एलटीटीई का दावा है कि सोमवार की बमबारी में मारे गए 55 लोगों में से 51 बच्चे थे. लेकिन सरकार का कहना है कि उन्होंने एलटीटीई के एक ट्रेनिंग कैंप को निशाना बनाया था.