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गुरुवार, 17 अगस्त, 2006 को 13:43 GMT तक के समाचार

सुशील कुमार झा
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

वीपी किसानों के लिए गिरफ़्तार हुए

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का कहना है कि देश की राजनीति में पूंजी और पूंजीपति हावी होते जा रहे हैं और विभिन्न राज्यों में किसानों की ज़मीने औने-पौने दामों में औद्योगिक घरानों को मिल रही हैं.

उन्होंने किसी उद्योग समूह का नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि इसके विरोध में दादरी मुद्दे के ज़रिए आंदोलन शुरु हो गया है.

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पश्चिमी ज़िले बुलंदशहर के दादरी इलाक़े में किसानों की ज़मीन काफी कम क़ीमतों में रिलायंस को दी थी.

वीपी सिंह लगातार इसका विरोध करते रहे हैं और गुरुवार को उन्होंने इसके ख़िलाफ गिरफ्तारी भी दी.

गुरूवार को दादरी से 18 किलोमीटर दूर किसानों के लिए एक रैली का आयोजन किया गया था और इसमें शामिल होने के लिए जाते समय वीपी सिंह समेत कई नेताओं को दिल्ली उत्तर प्रदेश सीमा पर गिरफ्तार कर लिया गया.

जनमोर्चा की अगुआई में आयोजित इस रैली को कई अन्य राजनीतिक दलों ने भी समर्थन दिया और सभी लोगों ने एक सुर में मुलायम सिंह यादव सरकार की आलोचना की.

गिरफ्तारी देने वालों में राजबब्बर, सीपीआई नेता एबी बर्धन, समाजवादी नेता सुरेंद्र मोहन, दलित नेता उदित राज और कई अन्य नेता शामिल थे.

राजबब्बर ने राज्य सरकार पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि मुलायम सिंह ज़मीन की ख़रीद-बिक्री के एजेंट हो गए हैं और किसानों के हितों का ख़याल नहीं रख रहे हैं.

उन्होंने कहा कि किसान अपनी ज़मीन के बदले मुलायम सिंह से उनकी कुर्सी ले लेंगे.

आलोचना

सीपीआई नेता बर्धन ने भी आंदोलनकारी बयान देते हुए कहा कि गिरफ्तार होने वाले हाथों की कमी नहीं होगी पुलिस कम पड़ जाएंगी.

गिरफ्तारी से पहले भाषण देने वालों में मुलायम सिंह सरकार के एक मंत्री बिजेंन्द्र प्रताप सिंह भी शामिल थे जिन्होंने जमकर सरकार की आलोचना भी की.

अंत में वीपी सिंह ने राजनीतिक हलकों में अपनी साख के अनुसार कुछ ही शब्दों में बड़ी बात रखते हुए कहा कि वो सरकार नहीं बल्कि ज़माने को बदलने का बीड़ा उठा चुके हैं.

उनका कहना था कि यह आंदोलन किसानों और मज़दूरों के हालात बदलने के लिए शुरु किया गया है.

मुलायम सिंह सरकार ने इस रैली से पहले मंगलवार से ही पूरे राज्य में हज़ारों की संख्या में किसानों और जनमोर्चा के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया था.

जानकारों का मानना है कि चुनावों से पहले वीपी सिंह जैसे नेता का विरोध मुलायम सिंह के लिए मंहगा साबित हो सकता है और वो भी ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश में वोट बड़े पैमाने पर बंटे हुए हैं और एक-एक सीट महत्वपूर्ण हो सकती है.