गुरुवार, 17 अगस्त, 2006 को 16:44 GMT तक के समाचार
गीता पाँडे
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत में अगले साल अप्रैल से बारहवीं कक्षा के छात्रों को राजनीतिशास्त्र की नई पाठ्य पुस्तकें पढ़ने को मिलेंगी.
इन किताबों में 2002 के गुजरात दंगे और अयोध्या में विवादास्पद मस्जिद का विध्वंस जैसे विषय शामिल होंगे.
भारत के स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबों में आमतौर पर 1947 में भारत की ब्रितानी राज से आज़ादी के बाद की संवेदनशील राजनीतिक गतिविधियों की चर्चा नहीं होती है.
समझा जा रहा है कि इस नए पाठ्यक्रम से साठ साल की खाई को पाटने में मदद मिलेगी.
इस पर विचार विमर्श हो चुका है और इसे अनुमोदन मिल गया है. अब यह पुस्तकें लिखी जा रही हैं.
लेकिन इनमें से कुछ विषय भारत में अति संवेदनशील माने जाते हैं और शिक्षाविद इस बात पर ग़ौर कर रहे हैं कि क्या इन्हें लेकर तटस्थता बरती जाएगी.
दिशानिर्देश
वैसे इस पाठ्यक्रम पर विचार करने वाली समिति ने लेखकों के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी किए हैं.
उनसे कहा गया है कि वे अपने लेख सरकारी दस्तावेज़ों पर आधारित रखें और किसी व्यक्ति विशेष का उल्लेख न करें. इसके अलावा वे किसी भी तरह के विवाद से बचें.
अधिकतर शिक्षाविद इस बात पर सहमत हैं कि गुजरात के दंगे हों या अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिराए जाने का मामला या फिर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी का आपातस्थिति लागू करना. ये सब भारत के हाल के इतिहास का हिस्सा हैं और उन्हें पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए.
लेकिन ये विषय संवेदनशील हैं और शिक्षाविदों का मानना है कि किसी पाठ्यपुस्तक में उनके साथ न्याय हो पाना संभव नहीं होगा.
कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इन विषयों को उदासीन या तटस्थ रह कर नहीं लिखा जा सकता है.
इतिहासकार अरूप बनर्जी इस बाबत कहते हैं, "मुझे लगता है कि इसके लिए भाषा का सावधानी से इस्तेमाल किया जाएगा. इससे तथ्य बताए कम और झुपाए ज़्यादा जाएंगे."
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जब तक यह किताबें छप कर कक्षाओं में पहुँचेंगी तब तक क्या वे राजनीतिक दबाव का शिकार हो चुकी होंगी.