गुरुवार, 17 अगस्त, 2006 को 16:49 GMT तक के समाचार
शकील अख़्तर
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत में आतंकवाद के मुद्दे पर विचार-विमर्श करने के लिए प्रमुख मुस्लिम नेताओं ने 20 और 21 अगस्त को दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है.
यह पहला अवसर है जब मुस्लिम धार्मिक नेताओं की इस तरह की कोई कॉन्फ्रेंस हो रही है.
जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस में मुसलमानों की हर विचारधारा और पंथ के उलेमा हिस्सा लेंगे.
माना जा रहा है कि भारत में एक के बाद एक हुई कई घटनाओं से मुसलमानों को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है और वे अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए ही इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर रहे हैं.
सांसद मौलाना महमूद मदनी ने बीबीसी को बताया,‘‘अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के मामले में इस्लाम, मुसलमानों और मदरसों की जो तस्वीर पेश की जा रही है उस पर हमें चिंता है.’’
चिंता
उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा परिस्थिति में खामोशी देश और मुसलमानों, खास तौर से मदरसों की भूमिका के लिए हानिकारक सिद्ध होगी.’’
‘आतंकवाद कारण और हल’ के शीर्षक से यह कॉन्फ्रेंस दिल्ली में होगी और इसमें सरकार, सरकारी एजेंसियों और मीडिया के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा और भविष्य के लिए रास्ते तय किए जाएँगे.
मौलाना मदनी ने बताया इस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी भाग लेंगे. उनके अलावा कई अन्य मंत्रियों के हिस्सा लेने की भी संभावना है.
कॉन्फ्रेंस के एक चरण में देश के वरिष्ठ संपादकों को विचार-विमर्श और विचारों के आदान-प्रदान के लिए आमंत्रित किया गया है.
भारत के मुसलामनों में आम राय यह है कि आतंकवाद के संबंध में मीडिया में उन्हें सामूहिक रूप से दोषी के तौर पर पेश किया जाता है.