सोमवार, 14 अगस्त, 2006 को 14:48 GMT तक के समाचार
भारत के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा पर ज़ोर दिया है.
उन्होंने कहा कि व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा के चार पहलू हैं, देश की सीमा की सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा.
राष्ट्रपति का सारा भाषण इन्हीं चार पहलुओं पर केंद्रित रहा, इसके अलावा उन्होंने चिकित्सा, शिक्षा, विज्ञान और सामाजिक विकास के क्षेत्र में हुई प्रगति के कई उदाहरण भी दिए.
राष्ट्रपति ने कहा कि देश में राष्ट्रीय जागृति अभियान चलाए जाने की ज़रूरत है जिसका नेतृत्व करने के लिए युवा पीढ़ी को ज़ोर-शोर से आगे आना चाहिए.
बादामी रंग का सूट पहनकर राष्ट्र को संबोधित कर रहे राष्ट्रपति ने विज्ञान और तकनीक के साथ उच्च नैतिक मानदंडों को भारत के विकास की कुंजी बताया.
आतंकवाद
राष्ट्रपति कलाम ने अपने भाषण में कहा कि आतंकवाद को हराने के लिए भारत के हर समाज, वर्ग और धर्म के लोगों को मिलकर काम करना होगा.
आतंकवाद की चुनौती के बारे में उन्होंने कहा, "जब बुरे दिमाग़ वाले लोग बुरे काम करते हैं तो अच्छी सोच वाले लोगों को आगे आकर उसका मुक़ाबला करना चाहिए."
राष्ट्रपति ने आतंकवाद से निबटने के लिए कुछ सुझाव भी दिए. उन्होंने बैंकों में होने वाले लेन-देन पर कंप्यूटर प्रणाली के ज़रिए पैनी नज़र रखने और आंतकवादियों को जल्द से जल्द कड़ी सज़ा देने की बात कही.
राष्ट्रपति ने कहा कि आंतकवाद युद्ध का एक नया और भयावह चेहरा है जिसकी वजह से देश का विकास ख़तरे में पड़ सकता है.
ऊर्जा सुरक्षा
राष्ट्रपति एपेजी अब्दुल कलाम ने कहा कि देश पेट्रोलियम पदार्थों पर बहुत अधिक निर्भर है और उसका भंडार ख़त्म हो रहा है इसलिए ज़रूरी है कि भारत वैकल्पिक स्रोतों को विकसित करे.
राष्ट्रपति ने कहा बायोडीज़ल, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा जैसे साधनों पर ध्यान दिए जाने की ज़रूरत है, उन्होंने इस क्षेत्र में मिली सफलताओं को काफ़ी उत्साहवर्धक बताया है.
वर्ष 2030 तक वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोतों से 50 हज़ार मेगावाट बिजली बनाने का लक्ष्य भी उन्होंने सामने रखा.
शपथ
राष्ट्रपति ने स्कूली बच्चों को शपथ दिलाई कि वे कड़ी मेहनत से काम करेंगे और देश के विकास योगदान करेंगे.
उनके साथ-साथ स्कूली बच्चों ने दोहराया, "हम अच्छे आचरण से अच्छे राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करेंगे, जिससे समाज में सदभाव आएगा और देश का विकास होगा."
अपने भाषण के अंत में राष्ट्रपति ने जाने-माने वैज्ञानिक स्टीफ़न हॉकिंग के सवाल का ज़िक्र किया कि "मानवता अगले 100 वर्षों तक कैसे क़ायम रहेगी?"
उन्होंने कहा कि हॉकिंग को अभी तक इस सवाल का पक्का जवाब नहीं मिला है लेकिन भारत के नागरिकों को इस सवाल का जवाब ढूँढने की कोशिश करनी चाहिए.