शुक्रवार, 11 अगस्त, 2006 को 20:26 GMT तक के समाचार
अनीश अहलूवालिया
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत अमरीका परमाणु सहमति के मुद्दे पर सरकार को घेरने के बाद एक कदम और आगे जा कर शुक्रवार को विपक्षी एनडीए के नेताओं ने राष्ट्रपति एपीजे क़लाम से मुलाक़ात की.
उन्होंने राष्ट्रपति को सहमति के विषय में अपनी चिंताओं से अवगत कराया और इस मुद्दे पर माँग की कि सरकार संसद की सोच को ज़ाहिर करने के लिए एक प्रस्ताव लाए.
विपक्षी गठबंधन एनडीए के नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रपति क़लाम से मिल कर के उन्हें इस बाबत एक एक ज्ञापन भी दिया.
इसमें बताया गया है कि परमाणु सहयोग के क्षेत्र में भारत और अमरीका के बीच हुए समझौते को अमल में लाने के लिए जो विधेयक अमरीकी संसद में लाया जा रहा है उसमें कई ऐसी शर्तें हैं जिससे देश की सुरक्षा को ख़तरा पैदा हो सकता है.
इसी विषय की विस्तार से चर्चा करते हुए पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने पत्रकारों को बताया कि अमरीका में जो विधेयक लाया जा रहा है उसकी शर्तें समझौते में व्यक्त सिद्धांतों से कहीं ज्यादा कड़ी हैं जिससे भविष्य में भारत की अमरीका पर निर्भरता बढ़ेगी.
समझौते पर सवाल
उन्होंने यह भी बताया कि भारत के पास विवाद की स्थिति में इस समझौते को समाप्त करने के अधिकार नहीं होंगे जब कि अमरीकी संसद को यह अधिकार होगा कि वो अगर समझे की भारत ने समझौते की किसी शर्त का उल्लंघन किया है तो वो भारत को परमाणु इंधन की आपूर्ति बंद कर सकती है.
एनडीए ने माँग की है कि भारत को इन तीनों शर्तों से इनकार करना चाहिए और उसे वही दर्जा मिलना चाहिए जो कि एक परमाणु शक्ति संपन्न देश को होता है.
यशवंत सिन्हा ने आरोप लगाया कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार इस मुद्दे पर संसद को पूरी जानकारी नहीं दे रही है.
सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रपति से मिल कर उन्होंने माँग रखी है कि सरकार इस विषय में अपना जो विचार रखती है उसे ज़ाहिर करने वाला एक प्रस्ताव संसद में लाए ताकि भविष्य में वो उसी के दायरे में रह कर फ़ैसला करे.
यशवंत सिन्हा ने कहा है कि राष्ट्रपति कलाम ने विपक्ष को आश्वासन दिया है कि वो उनके ज्ञापन और अमरीकी विधेयक का अध्ययन कर के सरकार को अपने विचारों से अवगत कराएंगे.
ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि इसके अंतिम स्वरूप को देख कर ही भारत सरकार समझौते के बारे में अपना फ़ैसला सुनाएगी और ऐसा कोई फ़ैसला नहीं किया जाएगा जिससे देश की सुरक्षा को ख़तरा हो.
जहाँ तक संसद में सरकार की सोच को सामने रखने का प्रस्ताव लाने की विपक्ष की माँग का सवाल है, शुरु में कुछ वामपंथी दल भी यह विचार रखते थे लेकिन बाद में उन्होंने इस माँग से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं.