बुधवार, 09 अगस्त, 2006 को 18:33 GMT तक के समाचार
नेपाल सरकार और माओवादी विद्रोहियों के बीच हथियारों की निगरानी के मुद्दे पर सहमति हो गई है. इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता खटाई में पड़ गई थी.
राजधानी काठमांडू में सहमति के बारे में बयान जारी किया गया है और संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिख कर यह सुनिश्चित करने की अपील की गई है कि दोनों पक्ष इस समझौते को मानें.
दोनों पक्ष इस बात पर राज़ी हो गए हैं कि दोनों के सैनिक अपने अपने स्थानों पर बने रहेंगे और संयुक्त राष्ट्र इसकी निगरानी करेगा.
इससे पहले माओवादियों ने चेतावनी दी थी कि राजशाही के मुद्दे पर शांति वार्ता टूट सकती है.
अप्रैल महीने में नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र के सत्ता त्यागने के बाद विद्रोहयों ने संघर्षविराम कर दिया था.
महत्वपूर्ण घटना
इस बयान में कहा गया है कि नेपाल की सेना अपनी बैरकों में बनी रहेगी जबकि माओवादी विद्रोही अपने हथियार किसी एक शिविर में जमा कर के रख देंगे.
प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला और माओवादी नेता प्रचंड के बीच हुई बातचीत के बाद यह सहमति बनी है.
गृह मंत्री और सरकार के मुख्य वार्ताकार कृष्ण प्रसाद सितौला ने कहा ' शांति प्रक्रिया में यह एक महत्वपूर्ण क़दम है. हमने शांति और समृद्धि की आम लोगों की भावनाओं का ध्यान रखा है.'
उधर माओवादियों की ओर से बातचीत कर रहे कृष्ण महारा भी सकारात्मक थे. उनका कहना था ' इस समझौते से आपसी अविश्वास कम हुआ है और शांति प्रक्रिया के लिए दरवाज़े खुल गए हैं. '
जानकारों का मानना है कि इस समझौते से अंतरिम सरकार में माओवादियों के शामिल होने का रास्ता खुल गया है जिसके बाद से प्रतिनिधि सभा नेपाल का भविष्य तय कर सकेगी.
जून महीने में माओवादियों और सात दलों के गठबंधन ने सत्ता में भागेदारी संबंधी ऐतिहासिक समझौता किया था.
हालांकि पिछले कुछ हफ्तों से हथियारों की निगरानी और राजशाही के मुद्दे पर शांति वार्ताएं टूटने के कगार पर पहुंच गई थीं.
माओवादी कम्युनिस्ट लोकतंत्र चाहते हैं जबकि प्रधानमंत्री कोईराला राजशाही को एक प्रतीकात्मक भूमिका में रखने के हामी हैं.