मंगलवार, 08 अगस्त, 2006 को 22:54 GMT तक के समाचार
इराक़ में तेल के बदले अनाज कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आई वोल्कर रिपोर्ट के बाद उपजे विवाद के कारण भारत के पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह को न केवल मंत्रिपद छोड़ना पड़ा बल्कि उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी निलंबित कर दिया गया है
आइए जानते हैं कि इस विवाद में कब क्या हुआ.
27 अक्तूबर- इराक़ में सद्दाम हुसैन के शासनकाल के दौरान संयुक्त राष्ट्र के तेल के बदले अनाज कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही पॉल वोल्कर समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट दी.
29 अक्तूबर- मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस रिपोर्ट में कांग्रेस पार्टी और नटवर सिंह का नाम 'अनुबंध के बिना फायदा' लेने वालों की सूची में आया. कांग्रेस और सिंह ने इसका खंडन किया. भाजपा ने नटवर सिंह के इस्तीफ़े की मांग की.
30 अक्तूबर- यूपीए की प्रमुख घटक दल माकपा ने जांच की मांग की.
01 नवंबर- नटवर सिंह ने विदेश मंत्री का पद छोड़ने से इनकार किया.
02 नवंबर- नटवर सिंह औऱ उनके पुत्र जगत सिंह और उनके संबंधी अंदलीब सहगल का नाम सामने आया.
03 नवंबर- बीजेपी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर नटवर सिंह को हटाने और जांच की मांग की.
04 नवंबर- एनडीए ने यह मुद्दा राष्ट्रपति के समक्ष उठाया और देश भर में विरोध प्रदर्शन का फ़ैसला किया.इसी दिन पॉल वोल्कर ने बयान दिया कि रिपोर्ट में जिसके भी नाम हैं उन्हें जानकारी दे दी गई है.
05 नवंबर- नटवर सिंह ने वोल्कर के बयान का खंडन किया. इसी दिन सरकार ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि निरुपम सेन को महासचिव कोफी अन्नान और वोल्कर से मिलकर सच्चाई का पता लगाने को कहा.
06 नवंबर- प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोनिया गांधी और अपने कैबिनेट से विचार विमर्श किया और वोल्कर मामले से जुड़े तथ्य जुटाने के लिए विशेष दूत की नियुक्ति की.भाजपा ने सीबीआई जांच की मांग की. नटवर सिंह ने इस्तीफ़े से इंकार किया.
07 नवंबर- नटवर सिंह से विदेश मंत्री का प्रभार छीना गया. कांग्रेस ने अन्नान को पत्र लिख कर सभी दस्तावेज मांगे, एनडीए ने नटवर सिंह को हटाने की मांग की.
11 नवंबर- वोल्कर समिति की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए समिति के गठन की सिफारिश कैबिनेट ने कर दी.
दिसंबर- नटवर सिंह को कांग्रेस कार्यसमिति से निकाला गया और उन्होंने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया. पाठक समिति का गठन और जांच शुरू.
03 अगस्त- पाठक समिति की रिपोर्ट आई और मीडिया को लीक हुई जिसमें कहा गया कि नटवर सिंह, उनके पुत्र जगत सिहं ने तेल अनुबंध दिलवाने के लिए पद का दुरुपयोग किया.
08 अगस्त- नटवर सिंह को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किया गया.