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सोमवार, 07 अगस्त, 2006 को 13:25 GMT तक के समाचार

पाकिस्तानी रिएक्टर रिपोर्ट पर सवाल

अमरीका और पाकिस्तान दोनों ने एक अमरीकी संस्था की उस रिपोर्ट को लेकर सवाल खड़े किए हैं जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान एक नया परमाणु रिएक्टर बना रहा है.

जुलाई में अमरीका की संस्था इंस्टीट्यूट फ़ॉर सांइस एंड इंटरनेश्नल सेक्यूरिटी ने पाकिस्तान में ख़ुशाब परमाणु केंद्र की तस्वीरें प्रकाशित की थीं.

रिपोर्ट में कहा गया था कि यहाँ से इतना प्लूटोनियम बन सकता है जिससे सालाना 40 से 50 परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं.

'ग़लत विशलेषण'

लेकिन अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एडगर मैथ्यूस ने कहा है कि
‘परमाणु रिएक्टर की क्षमता अनुमान से 10 गुना से भी ज़्यादा कम’ है.

इससे पहले न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार ने अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवुक्ता फ़्रेडरिक जोंस के हवाले से लिखा था कि ‘आईएसआईएस का विशलेषण ग़लत है’.

जबकि अमरीका में पाकिस्तान के राजदूत महमूद अली दुर्रानी ने भी कहा है कि आईएसआईएस के विशलेषण में तथ्यों को बहुत ‘बढ़ा-चढ़ा’ कर बताया गया है.

वाशिंगटन टाइम्स अख़बार को दिए एक साक्षात्कार में पाकिस्तानी राजदूत ने ये तो स्वीकार किया कि रिएक्टर से मिलने वाले प्लूटोनियम का इस्तेमाल सैन्य या शांतिपूर्ण मकसद के लिए किया जा सकता है लेकिन साथ ही कहा कि ‘ये सही नहीं है कि इससे हमारी परमाणु क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी’.

लेकिन इंस्टीट्यूट फ़ॉर सांइस एंड इंटरनेश्नल सेक्यूरिटी संस्था का कहना है कि उसका विशलेषण सही है.

अपनी वेबसाइट पर जारी ताज़ा बयान में रिपोर्ट के लेखकों ने कहा है कि
वो अब भी मानते हैं कि नए रिएक्टर से पाकिस्तान को उससे कई गुना ज़्यादा प्लूटोनियम मिल सकता है जितना कि अब मिल रहा है.

राय बँटी हुई

आईएसआईएस की रिपोर्ट को लेकर विशेषज्ञों का मत बँटा हुआ है.

अमरीका में दक्षिण एशियाई सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ माइकल क्रेपन का कहना है कि आईएसआईएस का दावा काफ़ी ‘हैरान करने वाला’ है. उनके मुताबिक किसी भी देश के कथित परमाणु कार्यक्रम के बारे में बाहरी सूत्रों को इतनी जानकारी हो इसे लेकर उन्हें संदेह है.

लेकिन परमाणु अप्रसार मामलों के विशेषज्ञ लियोनार्ड वेएस्स ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि अगर पाकिस्तान अपने परमाणु असले में बढ़ोतरी कर रहा है तो इसमें हैरानी की बात नहीं है.

इंस्टीट्यूट फ़ॉर सांइस एंड इंटरनेश्नल सेक्यूरिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ख़ुशाब में परमाणु रिएक्टर के बनने से पाकिस्तान और भारत के परमाणु असले में ज़बरदस्त बढ़ोत्तरी हो सकती है.

विशेषज्ञों के मुताबिक इस रिपोर्ट को जारी करने की तारीख़ काफ़ी अहम है क्योंकि अमरीका भारत के साथ हुई परमाणु सहमति पर मुहर लगाने की दहलीज़ पर है.