सोमवार, 07 अगस्त, 2006 को 16:54 GMT तक के समाचार
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश में इस वर्ष दिमाग़ी बुख़ार से 58 लोगों की मौत हो गई है जबकि क़रीब 250 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं.
इस बीमारी से मरने वालों में अधिक संख्या बच्चों की है.
इस बीमारी से लोगों के मरने के ये मामले राज्य के पूर्वी ज़िलों में सामने आए हैं. इनमें से कुछ नेपाल सीमा से सटे हुए हैं.
हालांकि इस बीमारी की रोकथाम के लिए इस वर्ष राज्य सरकार की ओर से गर्मी के मौसम में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया गया था.
ग़ौरतलब है कि पिछले वर्ष भी दिमाग़ी बुख़ार से सबसे प्रभावित ज़िलों में पूर्वी उत्तरप्रदेश के गोरखपुर, महाराजगंज और कुशीनगर थे.
चिंता
सरकारी आँकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष दिमाग़ी बुख़ार से राज्य भर में 1500 से भी ज़्यादा लोगों की जानें गई थीं.
इस रोग के शुरुआती मामले भी वर्ष 1977 में राज्य के पूर्वी इलाकों में ही सबसे पहले देखने को मिले.
एक अनुमान के मुताबिक तब से लेकर अब तक 10,000 से भी ज़्यादा लोग इस बीमारी के चलते अपनी ज़िंदगी खो चुके हैं.
यह बीमारी मुख्य रूप से वर्षा ऋतु के दौरान मच्छरों के काटने से फ़ैलती है.
पिछली वर्ष जिस तेज़ी से यह बीमारी इन ज़िलों में फैली उसके बाद सरकार को चीन से बड़े पैमाने पर इसके टीके आयात करने पड़े थे.