http://www.bbcchindi.com

शनिवार, 05 अगस्त, 2006 को 11:27 GMT तक के समाचार

'एलटीटीई विद्रोही मुट्टूर से हटे'

श्रीलंका में तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई ने कहा है कि वे पूर्वोत्तर शहर मुट्टूर से पीछे हट गए हैं.

ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से श्रीलंका की सेना और तमिल विद्रोहियों में भीषण लड़ाई हो रही थी.

दोनों पक्षों के बीच चार साल पहले संघर्षविराम समझौता होने के बाद से यह सबसे भीषण लड़ाई थी.

इस लड़ाई में कम से कम 20 आम लोग मारे गए हैं. यह लड़ाई जल आपूर्ति पर उठे विवाद को लेकर क़रीब एक सप्ताह पहले भड़क उठी थी.

एलटीटीई ने शनिवार को कहा कि वे मुट्टूर से इसलिए पीछे हट रहे हैं क्योंकि उनके पक्ष का रुख़ दर्ज हो गया है.

इस लड़ाई की वजह से इलाक़े के हज़ारों लोग अपने घरों से भागने को मजबूर हो गए थे.

श्रीलंका में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जल विवाद अब भी अनसुलझा है और तमिल विद्रोहियों ने अब भी उस नहर को नहीं खोला है जिससे मुट्टूर क्षेत्र को पानी मिलता है.

इस बीच नॉर्वे के एक शांति दूत जॉन हनसेन बुएर ने सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात की है और संभवतः रविवार को वह तमिल विद्रोहियों से मुलाक़ात करेंगे.

विवाद

उधर श्रीलंका की सेना का कहना है कि मुट्टूर शहर का ज़्यादातर हिस्सा उनके नियंत्रण में आ गया है.

श्रीलंका में संघर्ष के मूल कारण

पिछले एक हफ्ते से चल रहे संघर्ष में अब तक 20 नागरिकों की जान गई है. शुक्रवार को हज़ारों लोग मुट्टूर से पलायन कर गए.

यह शहर पिछले कुछ दिनों से श्रीलंका की मुख्य भूमि से बिल्कुल कटा हुआ है. रेडक्रास का कहना है कि सुरक्षा गारंटी लेने के बावजूद नागरिकों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है.

कोलंबो में सेना के प्रवक्ता मेजर उपली राजपकक्षे ने एपी संवाद समिति से कहा, ' हमारे सैनिकों ने एक बड़ा हमला विफल कर दिया है और हमारी जानकारी के मुताबिक 35 विद्रोही मारे गए हैं.'

सेना के इस दावे की स्वतंत्र रुप से पुष्टि नहीं हो सकी है. सेना का कहना है कि विद्रोहियों के साथ मुट्टूर शहर के पास चल रहे संघर्ष में 23 सैनिक भी मारे गए हैं.

रेडक्रास का कहना है कि मुट्टूर में संघर्ष शुरु होने के बद अब तक 22 हज़ार लोग अपना घरबार छोड़कर पलायन कर चुके हैं और इनमें से अधिकतर मुस्लिम हैं.

मुट्टूर में संघर्ष उस समय शुरु हुआ जब विद्रोहियों ने माविलारु में बांध का एक गेट बंद कर दिया जिससे कई किसानों को दिक्कतें होने लगीं. सेना ने इस गेट को खोलने के लिए हमला किया और संघर्ष शुरु हो गया.