शनिवार, 29 जुलाई, 2006 को 11:15 GMT तक के समाचार
श्रीलंका सरकार ने तमिल विद्रोहियों के साथ लागू होने वाले संघर्षविराम की निगरानी के लिए तैनात अपने पर्यवेक्षकों को वापिस बुलाने के डेनमार्क और फिनलैंड के फ़ैसले की आलोचना की है.
उधर श्रीलंका की वायुसेना ने तमिल विद्रोहियों के ठिकानों पर शनिवार को चौथे दिन भी हमले जारी रखे.
ताज़ा लड़ाई सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच एक जल क्षेत्र को लेकर उठे विवाद के फलस्वरूप हो रही हैं.
श्रीलंका में शांति प्रक्रिया को एक और झटका इस रूप में लगा है कि डेनमार्क और फिनलैंड ने अपने पर्यवेक्षकों को संघर्षविराम निगरानी मिशन से वापिस बुलाने का ऐलान कर दिया है.
श्रीलंका निगरानी मिशन में पाँच देशों के पर्यवेक्षक हैं जिनमें से तीन यूरोपीय संघ के सदस्य देश हैं.
यूरोपीय संघ ने तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई को "आतंकवादी संगठन" क़रार दे दिया है जिसके बाद तमिल विद्रोहियों ने माँग की है कि यूरोपीय संघ के सदस्य देश अपने पर्यवेक्षक श्रीलंका से वापिस बुला लें.
डेनमार्क और फिनलैंड के इस फ़ैसले के बाद श्रीलंका निगरानी मिशन के सदस्यों की संख्या लगभग एक तिहाई कम हो जाएगी. इस मिशन में लगभग साठ लोग सक्रिय हैं.
ग़ैरयूरोपीय सदस्य देशों नॉर्वे और आइसलैंड ने कहा है कि वे इस कमी को नहीं पूरा कर सकते हैं. इसके बाद यह आशंका पैदा हो गई है कि पहले से ही नाज़ुक हो चुका संघर्षविराम और कमज़ोर हो जाएगा.
श्रीलंका सरकार के प्रवक्ता गरेलिया रम्बुकवेल्ला ने कोलंबो में कहा कि सरकार को इस बारे में अभी आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि मिलनी है लेकिन प्रवक्ता ने कहा कि सरकार इस तरह के एकतरफ़ा फ़ैसले के ख़िलाफ़ है.
प्रवक्ता ने कहा, "एक संघर्षविराम समझौता लागू है और उसके अनुसार श्रीलंका निगरानी मिशन में किसी तरह का फेरबदल करने का कोई भी फ़ैसला सभी पक्षों के साथ विचार-विमर्श से किया जाना चाहिए."
लड़ाई
उधर जल विवाद के बाद लड़ाई चौथे दिन में प्रवेश कर गई है और श्रीलंका की वायु सेना पूर्वोत्तर में तमिल विद्रोहियों के ठिकानों को निशाना बना रहे हैं.
श्रीलंका सरकार का आरोप है कि तमिल विद्रोहियों ने वह जल क्षेत्र बंद कर दिया है जिस पर हज़ारों किसानों का जीवन निर्भर है.
जबकि तमिल विद्रोहियों का कहना है कि वे स्थानीय तमिल लोग हैं जो ज़्यादा अधिकारों की माँग कर रहे हैं.