शुक्रवार, 28 जुलाई, 2006 को 14:57 GMT तक के समाचार
भारत के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कश्मीर में भारत और पाकिस्तान को अलग करने वाली नियंत्रण रेखा के आसपास के क्षेत्र को आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करने की बात कही है.
उन्होंने यह बात शुक्रवार को भारत प्रशासित कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में राज्य विधानमंडल के एक संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कही.
राष्ट्रपति जम्मू-कश्मीर की दो दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार को वहाँ पहुँचे हैं.
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को चाहिए कि नियंत्रण रेखा के आसपास की ज़मीन को खेती के लिए लोगों को आबंटित किया जाए.
उनका तर्क था कि एक बार अगर उन जगहों पर खेती का काम शुरू हो जाता है तो नागरिक ख़ुद ही यहाँ पर असामाजिक तत्वों के हस्तक्षेप का विरोध शुरू कर देंगे.
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस काम में सेना की मदद भी ले सकती है. राष्ट्रपति यह भी ध्यान दिलाने से नहीं चूके कि इस विकसित किए जाने वाले क्षेत्र के लिए सुरक्षा के ख़ास इंतज़ाम करने पड़ेंगे.
'ख़त्म हो आतंकवाद'
राष्ट्रपति ने कहा कि राज्य से चरमपंथी गतिविधियों को समूल नष्ट करना होगा और इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार से कहा कि कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जो महकमे बने हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि इस समस्या से राज्य को निजात मिल पाए.
उन्होंने कहा, "राजनीति राज्य के नागरिकों पर हो रही हिंसा से ऊपर उठकर होनी चाहिए."
अपने भाषण में राष्ट्रपति ने इस बात की भी पैरवी की कि चरमपंथी गतिविधियों के ख़िलाफ़ लड़ाई में आम नागरिकों का भी भागीदार बनाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि सभी शिक्षण संस्थानों में प्राथमिक स्तर से ही मूल्य आधारित शिक्षा को लागू करने की आवश्यकता है. इसके अलावा सभी स्कूलों में एनसीसी जैसे प्रशिक्षण की आवश्यकता है.
राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान राज्य में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.
हालांकि इस यात्रा के विरोध में अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गीलानी ने दो दिनों की हड़ताल का आहवान किया है.