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गुरुवार, 27 जुलाई, 2006 को 10:35 GMT तक के समाचार

अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर

कश्मीर में 'फर्जी मुठभेड़' मामले की जाँच

भारत प्रशासित कश्मीर में अधिकारियों ने यह पता लगाने के लिए दो शवों की जाँच का आदेश दिया है कि क्या दफ़नाए वही दो मज़दूर हैं जिनके बारे में कहा गया है कि भारतीय सैनिकों ने कथित रूप से एक फर्जी मुठभेड़ में उन्हें मार दिया था.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अब्दुल सुबहान लोन ने बीबीसी को बताया कि शवों को क़ब्र से निकाला जा रहा है और उन्हें डीएनए परीक्षणों के लिए भेजा जाएगा.

हालाँकि पुलिस को ये शव निकालने के प्रयासो में स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है.

अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय लोगों का कहना है कि क़ब्रों से इस तरह शवों को निकालना अपमानजनक है.

दो साल पहले सेना ने पुलिस में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने कूपवाड़ा ज़िले के लालपुरा गाँव में एक मुठभेड़ में दो चरमपंथियों को मार दिया है.

कुछ महीने बाद श्रीनगर के गांदरबल इलाक़े से लापता दो युवाओं के अभिभावकों ने क़ब्रों से शवों को निकालकर देखा और दावा किया कि वे उनके बेटों की हैं.

फिर उन शवों को दफ़नाने के लिए गांदरबल में पैतृक क़ब्रिस्तान ले जाया गया था.

लेकिन अक्तूबर 2005 में जम्मू के दो लापता मज़दूरों के परिवारों ने कुछ सैन्य अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने लालपुरा में मज़दूरों को एक फर्जी मुठभेड़ में मार दिया था.

तभी से पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है.

एक अन्य घटना में मार्च 2000 में पथरीबल में एक कथित 'सुनियोजित मुठभेड़' में पाँच निर्दोष लोगों के मारे जाने के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने एक ब्रिगेडियर और चार अन्य सैन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ आरोप निर्धारित किए हैं.

उस समय सेना ने दावा किया था कि उसने "पाँच विदेशी चरमपंथियों" को मार दिया है जो छट्टीसिंहपुरा गाँव में 35 सिखों के नरसंहार के लिए ज़िम्मेदार थे.