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बुधवार, 26 जुलाई, 2006 को 12:41 GMT तक के समाचार

ज़ुबैर अहमद
बीबीसी संवाददाता, मुंबई

छब्बीस जुलाई का ख़ौफ़....

मोहम्मद अफ़ज़ल भारत के शहर मुंबई के सकीनाका में हुई प्रार्थना सभा में अकेला महसूस कर रहे थे. ठीक एक वर्ष पहले चार बजे शाम को उनकी दुनिया हमेशा के लिए उजड़ गई.

पहाड़ से गिरती चट्टानों ने 15 वर्षीय अफ़जल के परिवार के सभी नौ सदस्यों को कुचल डाला था. उसके माता पिता के अलावा उसके भाई बहन भी इस क़ुदरती क़हर के शिकार बन गए.

केंद्र और राज्य सरकारों ने उसे साढ़े आठ लाख रुपए का मुआवज़ा ज़रूर दिया है लेकिन नाबालिग़ होने के कारण वह अभी इसका इस्तेमाल नहीं कर सकता.

लेकिन अफ़ज़ल उन पैसों का क्या करे जब उसका परिवार ही नहीं रहा. अफ़ज़ल कहता है, ‘‘उन सबकी बहुत याद आती है. मुझे अभी भी डर लगता है.’’

आप बीती

अफ़ज़ल भी शायद अपनी कहानी कहने के लिए ज़िंदा न रहता अगर वह अपने दोस्तों के साथ खेलने बाहर न जाता. अफ़ज़ल की तरह साकीनाका में और भी कई अनाथ बच्चे अपनी कहानी कहने के लिए ज़िंदा बच गए हैं.

इस हादसे में यहां 72 लोग चट्टानों में दब कर मर गए थे. 12 साल के सईद ने अपने माता पिता और एक बहन को खो दिया. वह अब अपने मामा के साथ रहता है.

साकीनाका की कहानी मुंबई महानगर की कहानी है. पिछले साल 26 जुलाई के बाढ़ ने इस शहर में जो तबाही मचाई थी उसे यहां के लोग भूल नहीं पाए हैं.

पूरे महाराष्ट्र में 1100 से अधिक लोग मारे गए थे. गाँव के गाँव बाढ़ में बह गए थे और पांच लाख लोग बेघर हो गए थे.

बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों से 250 लोगों की जाने गई थीं.

लेकिन सबसे अधिक तबाही और बर्बादी मुंबई में मची थी. 26 जुलाई की सुबह से ही बारिश हो रही थी. तीन बजे अचानक शहर के उपनगरों के ऊपर बादल फटे और कुछ घंटों में मुंबई में 944 मिलीमीटर बारिश हो गई जो विश्व इतिहास में एक दिन में सबसे ज़्यादा बारिश होने का रिकॉर्ड है.

आधा से ज़्यादा शहर पानी से भर गया. तीन दिनों तक मुंबई दुनिया से कटा रहा.

13 लोग अपनी गाड़ियों में ही डूब कर मर गए. कई दिनों तक लाशें पानी में तैरती रहीं. हज़ारों घरों में पानी पहली मंज़िल तक घुस आया.

सत्यस्वरूप आपदा को रोकने के उपायों के एक विशेषज्ञ हैं. उनका पांच साल का बेटा स्कूल के बाहर सड़क पर अपनी गाड़ी में फंसा था. वो दिन उन्हें अच्छी तरह याद है.

वो कहते हैं, “मैं परेशान होकर अपने बेटे के स्कूल तक दौड़ा. पानी कमर से ऊपर तक था. रास्ते में कई गाड़ियों को और कई लोगों को फंसा हुआ देखा. अचानक मेरी नज़र अपने बेटे के स्कूल की गाड़ी पर पड़ी. गाड़ी सड़क पर फंसी थी. मैंने अपने बेटे समेत अपने मोहल्ले के 12 और बच्चों को लिया. उन्हें एक रस्सी से एक साथ कसा और सड़क के बीच डिवाइडर पर आहिस्ता-आहिस्ता चलते हुए घर पहुंचा.”

लेकिन स्कूल गए कई और बच्चे दोबारा घर लौटे नहीं पाए. एक ऑटो में बैठे तीन बच्चे डूब कर मर गए.

बाढ़ की मार

मुंबई में बारिश से मरने वालों में कई युवा भी थे. मरने वालों की याद में बुधवार को शहर में जगह-जगह प्रार्थना सभाएं हुईं.

राज्य सरकार आज भी बाढ़ की मार से पूरी तरह संभल नहीं पाई है. राज्य को इस आपदा से डेढ़ अरब डॉलर का नुकसान हुआ.

सड़कों और पुलों को बनाने का काम आज भी जारी है. 100 गाँवों को फिर से बसाया जा रहा है. मुंबई में तबाही लाने वाली मीठी नदी की सफ़ाई का काम अब भी चल रहा है.

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा ‘‘हमें इस बाढ़ से हुए नुकसान के असर को खत्म करने में दो-तीन साल और लग जाएंगे.’’

इस साल भी कुछ सप्ताह पहले हुई बारिश के चलते रेल गाड़ियों का परिचालन बंद करना पड़ा था और सड़कों पर यातायात रोकना पड़ा था.

लोग घबराकर अपने परिवार वालों को घर लौटने की सलाह देने लगे थे.

यूँ लगता है मुंबई के लोगों की यादाश्त में 26 जुलाई हमेशा के लिए समा गया है.