सोमवार, 24 जुलाई, 2006 को 16:59 GMT तक के समाचार
संजीव श्रीवास्तव
भारत संपादक, बीबीसी हिंदी सेवा
पूर्व विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने कहा है कि वो जल्द ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उस व्यक्ति का नाम बता देंगे जो कथित रूप से भारतीय परमाणु कार्यक्रम के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी अमरीका को देता था.
हालाँकि उन्होंने मीडिया के सामने इस नाम को सार्वजनिक नहीं किया और कहा कि वो इसे केवल प्रधानमंत्री को ही बताएँगे.
पिछले दिनों जसवंत सिंह ने आरोप लगाया था कि पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय में नियुक्त यह व्यक्ति ऐसी जानकारी अमरीका को देता रहा था जो देश के हितों के ख़िलाफ़ थी.
रविवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जसवंत सिंह को चुनौती दी थी कि वो साहस रखते हैं तो उस व्यक्ति का नाम बताएं.
इस बारे में बीबीसी से बात करते हुए जसवंत सिंह का कहना है कि इसमें साहस दिखाने जैसी कोई बात नहीं है और जो जानकारी उनके पास है वो प्रधानमंत्री को दी जा सकती है.
जसवंत सिंह का कहना है कि उन्हें इस व्यक्ति के बारे में जानकारी एक अमरीकी अधिकारी के पत्र के ज़रिए मिली थी.
नैतिक मामला
हाल में प्रकाशित जसवंत सिंह की किताब 'ए कॉल टू ऑनर' में उन्होंने एक बार फिर कंधार अपहरण कांड की चर्चा करते हुए बताया है कि उनका भारतीय बंधकों को छुड़ाने के लिए चरमपंथियों को कंधार ले जाकर रिहा करना सही था.
इस बारे में बीबीसी से बात करते हुए उनका कहना था कि उस समय सरकार को नैतिक दृष्टि से दो मुश्किल विकल्पों के बीच चयन करना था.
एक तरफ़ तीन चरमपंथियों को रिहा करना और दूसरी ओर लगभग 166 निर्दोष लोगों को निश्चित मौत के मुँह से निकालना. सरकार ने चरमपंथियों को रिहा कर के मासूम लोगों की जान बचाने का फ़ैसला किया जो कि सही था.
जसवंत सिंह ने बातचीत में यह भी कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनकी टिप्पणियों से उठे विवाद को उन्होंने ख़त्म करने की कोशिश की.
पहले रिपोर्टों के अनुसार कहा जा रहा था कि उन्होंने गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी सरकार की भूमिका की आलोचना की थी मगर बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि वो ऐसा नहीं सोचते.
जसवंत सिंह का कहना था कि गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने जिस समझ-बूझ के साथ स्थिति को सँभाला वो सराहनीय है.
मीडिया में यह बार-बार आता रहा है कि गुजरात दंगों के बारे में जसवंत सिंह की टिप्पणियों से भारतीय जनता पार्टी का एक तबका और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता नाराज़ चल रहे थे.