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रविवार, 23 जुलाई, 2006 को 23:30 GMT तक के समाचार

हंगामेदार हो सकता है संसद का सत्र

सोमवार से शुरु हो रहे संसद के मानसून सत्र में मुंबई बम धमाके, बढ़ती मंहगाई और पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह की पुस्तक को लेकर जारी विवाद समेत कई और मुद्दों पर गर्मागर्म बहस होने की पूरी संभावना है.

भाजपा के नेतृत्व में विपक्ष ने पहले ही साफ़ कर दिया है कि सरकार को आंतरिक सुरक्षा और ख़ुफिया विभागों की विफलता के साथ साथ बढ़ती मंहगाई के मुद्दे पर घेरा जाएगा.

लोकसभा में भाजपा के उपनेता विजय कुमार मल्होत्रा का कहना है, " हमारे पास कई मुद्दे हैं जिससे हम सरकार की विफलताओं को जनता के सामने ला सकेंगे."

मल्होत्रा ने कहा कि सरकार को मंहगाई, मुंबई बम धमाकों, किसानों की लगातार हो रही आत्महत्या और माओवादी हिंसा जैसे मुद्दों पर जवाब देना ही होगा.

इसके अलावा नौसेना वार रुम लीक मामला भी संसद में उठ सकता है जिसमें नौ सेना के चार अधिकारियों पर उपकरणों की ख़रीदारी से जुड़ी गुप्त सूचनाएं लीक करने का आरोप है.

इतना ही नहीं सरकार को वामपंथी दलों की भी नाराज़गी का सामना करना पड़ सकता है जो अमरीका और भारत के बीच हुए परमाणु समझौते पर सरकार से काफी नाराज़ है. वाम दलों ने साफ़ किया है कि इस मुद्दे पर बहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.

सरकार के सामने कई बड़े मुद्दों की बात कांग्रेस मानती है.

संसदीय कार्य मंत्री सुरेश पचौरी का कहना था कि मानसून सत्र में अग्नि III और जीएसएलवी के विफल परीक्षण, मुंबई बम धमाके, भारत अमरीका परमाणु समझौता और मंहगाई जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है.

पुस्तक विवाद

उधर सत्तारुढ़ कांग्रेस ने भी संसद में आरोपों का सामना करने के लिए तैयार दिखती है और पार्टी ने भाजपा नेता जसवंत सिंह की पुस्तक में लगाए गए आरोपों पर कड़ा रुख अख्तियार किया है.

पूर्व विदेश मंत्री ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि अब भी प्रधानमंत्री कार्यालय में कुछ जासूस हैं जो अमरीका के लिए काम करते हैं. उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया है.

रविवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस मुद्दे को बड़ी गंभीरता से लेते हुए जसवंस सिंह को चुनौती दी कि वो उस व्यक्ति का नाम बताएं जो पीएमओ में जासूस है.

कांग्रेस इस मुद्दे पर संसद में भी आक्रामक रवैया अपना सकती है.

विधेयकों पर चर्चा

मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी चर्चा होनी है जिसके दौरान बहस की संभावना बन सकती है.

कम से कम दो विधेयक तो ऐसे ज़रुर हैं. ' लाभ के पद ' संबंधी विधेयक पर चर्चा होनी है जिसे राष्ट्रपति ने एक बार विचार के लिए वापस किया था लेकिन कैबिनेट ने इसे बिना किसी फेर बदल के लागू करने का फ़ैसला किया है.

हालांकि कांग्रेस का कहना है कि इस बारे में राष्ट्रपति के अभिभाषण में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी.

दूसरा विधेयक उच्च शिक्षा संस्थानों में अन्य पिछड़ी जातियों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़ा है जिस पर पिछले कुछ दिनों में बड़ा आंदोलन हो चुका है लेकिन ऐसा लगता नहीं कि कोई भी दल इस विधेयक का विरोध करेगा.