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शुक्रवार, 21 जुलाई, 2006 को 10:22 GMT तक के समाचार

ज़ुबैर अहमद
बीबीसी संवाददाता, मुंबई

मुंबई धमाकों में पहली गिरफ़्तारियाँ

पुलिस ने मुंबई बम धमाकों के सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है. इस मामले में ये पहली गिरफ़्तारियाँ हैं.

इन लोगों को शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया और दस दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया.

उधर कीनियाई अधिकारियों का कहना है कि राजधानी मुम्बासा में भी एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है जिसका मुंबई बम धमाकों से संबंध हो सकता है.

अधिकारियों के अनुसार इस व्यक्ति का नाम अब्दुलकादिर करीम टुंडा है और जब इसे पाँच दिन की खोज के बाद पकड़ा गया तो इसके बाद आठ जाली पासपोर्ट पाए गए.

मुंबई में सिलसिलेवार हुए धमाकों में 182 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हो गए थे.

पुलिस का कहना है कि ख़लील अज़ीज़ और कमाल को बिहार के मधुबनी ज़िले से गिरफ़्तार किया गया जबकि मुमताज़ की गिरफ़्तारी मुंबई में हुई.

आतंकवाद विरोधी दस्ते के वरिष्ठ अधिकारी केपी सूर्यवंशी का कहना था कि गिरफ़्तार किए गए तीनों लोग 'आतंकवादी गतिविधियों' से संबंधित हैं.

उनका कहना था कि गिरफ़्तार किए गए लोगों के नेपाल और बांग्लादेश से संबंध हैं और ये प्रतिबंधित संगठन सिमी के सदस्य हैं.

पुलिस सूत्रों का कहना है कि ये लोग शायद सीधे तौर पर बम विस्फोटों में शामिल न हों लेकिन उन्होंने हमलों में मदद पहुँचाई हो सकती है.

सिलसिलेवार धमाके

उल्लेखनीय है कि 11 जुलाई की शाम मुंबई शहर लोकल ट्रेनों में एक के बाद एक सात धमाके हुए थे जिसमें 182 लोग मारे गए थे.

ये धमाके माहिम, माटुंगा, बोरीवली, बांद्रा, जोगेश्वरी, मीरारोड और खार क्षेत्रों में लोकल ट्रेनों में हुए थे.

हाल ही में आतंकवाद निरोधी दस्ते यानी एटीएस ने फॉरेंसिक जाँच की रिपोर्ट के बाद बताया था कि मुंबई बम धमाकों में आरडीएक्स का इस्तेमाल हुआ था.

इन धमाकों के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और कहा था कि मुंबई में हुए धमाकों का असर भारत-पाकिस्तान संबंधों पर पड़ सकता है.

इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच 20-21 जुलाई को होने वाली विदेश सचिव स्तर की वार्ता टाल दी गई थी.

इस पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ का कहना था कि 'भारत-पाकिस्तान शांति वार्ता की प्रक्रिया को स्थगित करना या रोकना आतंकवादियों की जीत होगी.'

उन्होंने कहा कि 'आतंकवादी' यही चाहते हैं और पाकिस्तान को यक़ीन है कि भारत सरकार नहीं चाहेगी कि जीत 'आतंकवादियों' की हो.