मंगलवार, 18 जुलाई, 2006 को 19:34 GMT तक के समाचार
असित जॉली
चंडीगढ़ से
पंजाब के जेलों में बंद क़ैदियों को पूरी पगड़ी न पहनने देने के चंडीगढ़ हाईकोर्ट के निर्णय पर सिखों के एक वर्ग ने नाराज़गी ज़ाहिर की है.
चंडीगढ़ हाईकोर्ट ने सोमवार को दिए अपने एक निर्णय में कहा था कि क़ैद के दौरान सिखों को सिर्फ़ सिर पर साफ़ा बाँघने की अनुमति दी जाए, पूरी पगड़ी पहनने की नहीं.
यह निर्णय सिख छात्र परिषद की एक याचिका पर सुनाया गया है.
याचिका में कहा गया था कि क़ैदियों को पूरी पारंपरिक पगड़ी पहनने की अनुमति दी जाए क्योंकि यह सिख धर्म का अनिवार्य हिस्सा है.
लेकिन अदालत ने सरकार के उस तर्क को स्वीकार कर लिया जिसमें कहा गया था कि पूरी पगड़ी पहनने से सुरक्षा व्यवस्था को ख़तरा पैदा होता है.
अदालत ने कहा कि क़ैदियों को सर पर साफ़ा बाँधने की अनुमति होनी चाहिए और साफ़े का आकार आधे वर्ग मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए.
इस निर्णय से नाराज़ सिख छात्र परिषद ने बीबीसी को बताया कि वे इस निर्णय के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे.
परिषद के अध्यक्ष करनैल सिंह पीरमोहम्मद ने कहा, "पगड़ी या दस्तार सिखों को गुरु गोबिंद सिंह जी ने दी थी."
सिख समुदाय के कई नेताओं ने कहा है कि सिख क़ैदियों को पगड़ी पहनने देने का अधिकार ने देना उनके अपनी ज़मीन पर उनके साथ हो रहा भेदभाव है.
उल्लेखनीय है कि सिख अपने धार्मिक पहरावे को लेकर पूरी दुनिया में अधिकार की लड़ाई लड़ते आए हैं.
पिछले दिनों फ्रांस सरकार के एक फ़ैसले को लेकर सिख समुदाय ने बड़ा विवाद खड़ा किया था.