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सोमवार, 17 जुलाई, 2006 को 06:57 GMT तक के समाचार

शालिनी जोशी
देहरादून

टिहरी बांध से बिजली उत्पादन शुरु

उत्तरांचल के टिहरी बांध से 35 साल के लंबे इंतजार के बाद बिजली उत्पादन शुरू हो गया है.

सोमवार की सुबह पांच बजकर पचपन मिनट पर इंजीनियरों ने टरबाइन से बिजली पैदा की और उसे मेरठ स्थित पावर ग्रिड से जोड़ दिया जिसके तहत 130 मेगावाट बिजली छोड़ी गई.

अंतिम दौर के तकनीकी परीक्षणों की लगातार कई दिनों और कई रातों की कवायद के बाद तड़के जब टिहरी बांध की पहली टरबाइन को पावर ग्रिड से जोड़ने में कामयाबी मिली तो पूरा भूमिगत पावर हाऊस जोरदार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.

इस ऐतिहासिक मौके पर दौरान रूस और जर्मनी के विशेषज्ञ भी मौजूद थे.

टिहरी हाइड्रो डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन यानी टीएचडीसी के जनरल मैनेजर प्रोजेक्ट ए एल शाह ने बताया कि मेरठ स्थित पावर ग्रिड तक टिहरी बांध के 1000 मेगावाट के प्रथम चरण के तहत 250 मेगावाट की पहली टरबाइन यूनिट ने 130 मेगावाट की बिजली प्रवाहित की है और यहां की मशीनें पावर ग्रिड से जुड़ गयी हैं.

टिहरी बांध में इस तरह की तीन और टरबाइनें है और हर टरबाइन की क्षमता 250 मेगावाट है.

टीएचडीसी के तकनीकी निदेशक सतीश चंद्र शर्मा के मुताबिक पहली यूनिट 30 जुलाई से विधिवत उत्पादन शुरू कर देगी और इसके बाद दूसरी यूनिट सितंबर में, तीसरी यूनिट अक्टूबर में और चौथी यूनिट नवंबर में शुरू कर दी जाएगी.

इस तरह इस साल के अंत तक 1000 मेगावाट बिजली उत्पादन के पहले चरण का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा.

इस बांध से कुल 2400 मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य है.

बांध निर्माण और विवाद

मिट्टी गारे औऱ पत्थर से तैयार टिहरी बांध –रॉक फिल ढांचे का एशिया का सबसे ऊंचा बांध है जिसकी ऊंचाई 260.5 मीटर है और दावा है कि यह बांध रिएक्टर पैमाने पर 8 की तीव्रता का भूकंप भी झेल सकता है.

सत्तर के दशक में शुरू हुई इस परियोजना को 1989 में टीएचडीसी के हवाले कर दिया गया था. निर्माण के चार दशकों के दौरान बांध को लेकर कई विवाद हुए.

बांध विरोध का एक लंबा आंदोलन पर्यावरणवादी सुंदर लाल बहुगुणा की अगुवाई में यहां चला लेकिन धीरे धीरे बांध विरोध का रूख लचीला होता गया.

नब्बे के दशक में टिहरी बांध से बड़े पैमाने पर शुरू हुए विस्थापन और पुनर्वास की प्रक्रिया ने स्थानीय लोगों को नए सिरे से आंदोलन पर विवश किया.

टिहरी शहर के अलावा 125 गांव और कई लाख हेक्टयेर ज़मीन बांध के जलाशय के कारण डूब रहे है और सवा लाख के करीब आबादी को विस्थापित और प्रभावित होना पड़ा है.

ये भी ध्यान देने वाली बात है कि इस बांध से गाडगिल फार्मूले के तहत उत्तर भारत के नौ राज्यो के बीच बिजली का बंटवारा होगा लेकिन उत्तरांचल का 12 फीसदी और उत्तरप्रदेश का 25 फीसदी हिस्सा इससे अलग है जो उन्हें पहले ही दे दिया जाएगा.

टीएचडीसी के तकनीकी निदेशक सतीश चंद्र शर्मा ने बांध के संभावित फायदे गिनाते हुए ये भी बताया कि दिल्ली की 40 लाख की आबादी के लिए 300 क्यूसेक्स पानी और उत्तरप्रदेश की 30 लाख की आबादी के लिए 200 क्यूसेक्स पानी इस बांध से मिलेगा.

उन्होंने बताया कि कई लाख हेक्टेयर ज़मीन को सिंचित करने की सुविधा भी बांध के ज़रिए छोड़े जाने वाले पानी से मिलेगी.

अब तीस जुलाई को परियोजना का औपचारिक उद्घाटन होना है जिसके बाद से लगातार व्यवसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा.