रविवार, 16 जुलाई, 2006 को 18:29 GMT तक के समाचार
अधिकारियों का कहना है कि मुंबई बम धमाकों के सिलसिले में पुलिस लगातार छापे मार रही है और दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया गया है. लेकिन किसी भी व्यक्ति को अभी तक गिरफ़्तार नहीं किया जा सका है.
मंगलवार को लोकल ट्रेनों में सिलसिलेवार हुए बम धमाकों में 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हो गए थे.
राज्य के गृह मंत्री आरआर पाटिल बिना सुरक्षा तामझाम के अचानक शहर के एक प्रमुख स्टेशन चर्च गेट पहुँच गए और उन्होंने यात्रियों से आश्वस्त करने की कोशिश की.
उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा कि सरकार यात्रियों की सुरक्षा प्रदान करने की हरसंभव कोशिश कर रही है.
गृह मंत्री का कहना था कि धमाकों की जाँच में प्रगति हुई है और जल्द ही सारा मामला स्पष्ट हो जाएगा.
नाराज़गी
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पुलिस मुस्लिम बहुल इलाक़ों में रोज़ाना छापे मार रही है और शनिवार को महिम इलाक़े के 200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया.
मुस्लिम समुदाय इन छापों से नाराज़ है और उसका कहना है कि वे छापों के ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन वे बेतरतीब मारे जा रहे हैं.
लेकिन छापों के बावजूद पुलिस को अभी तक कोई संदिग्ध व्यक्ति हाथ नहीं लगा है.
अधिकारियों को शक है कि इन धमाकों के पीछे भारत प्रशासित कश्मीर में सक्रिय लश्करे तैबा का हाथ हो सकता है लेकिन अभी तक उसे इस बात के ठोस सबूत नहीं मिले हैं.
इसके पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुंबई के दौरे के समय पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि उसके साथ शांति वार्ता तभी आगे बढ़ सकती है जब वह अपने यहाँ सक्रिय भारत विरोधी चरमपंथियों पर नियंत्रण करे.
प्रधानमंत्री का कहना था कि पाकिस्तान ने भारत विरोधी चरमपंथियों को अपने यहाँ समर्थन देना बंद नहीं किया है.
दूसरी ओर पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने मुंबई बम धमाकों की छानबीन में भारत की मदद करने का प्रस्ताव रखा था.