शनिवार, 15 जुलाई, 2006 को 20:53 GMT तक के समाचार
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दुनिया के औद्योगिक रूप से सबसे ज़्यादा विकसित आठ देशों यानि जी 8 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रविवार को मॉस्को रवाना हो रहे हैं.
मुंबई और श्रीनगर में हुए बम धमाकों को देखते हुए प्रधानमंत्री आतंकवाद के ख़िलाफ़ जी- 8 देशों से कड़ा रुख़ अपनाने का अनुरोध करेंगे.
विदेश सचिव विदेश सचिव श्याम सरन ने पत्रकारों से बातचीत में उम्मीद जताई कि जी-8 देशों की बैठक में मुंबई धमाकों के मद्देनज़र आतंकवाद के ख़िलाफ़ कड़ा बयान जारी होगा.
विदेश सचिव श्याम सरन ने कहा, " प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आतंकवाद के बारे में एक संयुक्त बयान के लिए मज़बूती से अपनी बात रखेंगे. यह ऐसा मामला नहीं, जिससे सिर्फ़ भारत प्रभावित है.''
उनका कहना था,'' जी-8 की बैठक से यह बात स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए कि आतंकवाद के मुद्दे पर अलग-अलग रुख़ नहीं अपनाया जा सकता.''
'सबकी समस्या'
विदेश सचिव ने कहा कि 'लंदन हो या मैड्रिड आतंकवाद दुनियाभर की समस्या है और मुंबई धमाका भी इसी की कड़ी है.'
ग़ौरतलब है कि जी-8 के देशों-अमरीका, जर्मनी, ब्रिटेन, फ़्रांस, रूस, कनाडा, इटली और जापान ने मुंबई बम धमाकों की कड़ी निंदा की थी.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी-8 की बैठक में पर्यवेक्षक के रूप में हिस्सा ले रहे हैं.
सम्मेलन में हिस्सा लेने के अलावा वो रूसी राष्ट्रपति पुतिन, अमरीकी राष्ट्रपति बुश, चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे.
वरिष्ठ पत्रकार भारत भूषण ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि मुंबई धमाकों के बाद इस सम्मेलन की भारत के लिए अहमियत और बढ़ गई है.
उनका कहना था कि भारत के लिए यह एक अच्छा मौक़ा है और वह मुंबई बम धमाकों के संदर्भ में विकसित देशों के नेताओं के समक्ष अपनी बात रख सकता है.
इसके पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुंबई का दौरा करने के बाद पाकिस्तान को चेतावनी दी थी और कहा था कि वह अपनी ज़मीन से भारत विरोधी चरमपंथी गतिविधियों पर क़ाबू करे.
प्रधानमंत्री ने भी कहा था, "अगर आतंकवादी गतिविधियों पर तुरंत नियंत्रण नहीं किया जाता है तो किसी भी सरकार के लिए शांति प्रक्रिया को आगे ले जा पाना बहुत मुश्किल होगा."