शनिवार, 15 जुलाई, 2006 को 07:28 GMT तक के समाचार
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दौरे के महज पखवाड़े के भीतर महाराष्ट्र में कर्ज़ के बोझ से दबे 35 और किसानों ने आत्महत्या कर ली है.
प्रधानमंत्री ने 'कपास बेल्ट' कहे जाने वाले महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के बदहाल किसानों के लिए 37 अरब 50 करोड़ रूपए के पैकेज की घोषणा की थी.
सरकारी कोशिश के बावजूद आत्महत्या की घटनाएँ बदस्तूर जारी रहने पर पिछले दिनों एक स्थानीय अदालत ने सरकारी महकमे को तलब किया.
अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि केंद्र सरकार से मदद की घोषणा के बावजूद आत्महत्या के मामले क्यों बढ़ रहे हैं.
अदालत ने प्रशासनिक अधिकारियों से राहत पैकेज का विवरण प्रस्तुत करने और इससे लाभ उठाने वाले लोगों के नाम वेबसाइट पर डालने को कहा है.
इससे पहले राज्य सरकार ने अदालत को बाताया था कि उसने पिछले एक वर्ष के दौरान लगभग 11 अरब रुपए कर्ज़दार किसानों के बीच वितरित किए हैं.
पिछले वर्ष जून के बाद से विदर्भ के 650 किसान आत्महत्या कर चुके हैं.
केंद्र का पैकेज
प्रधानमंत्री ने जो पैकेज घोषित किया है, उसका क्रियान्वयन अभी ज़मीनी स्तर पर नहीं हो रहा है.
इस पैकेज के तहत घोषित राशि में से 21 अरब 77 करोड़ रूपए की राशि कृषि परियोजनाओं पर ख़र्च की जानी है.
इसके अलावा किसानों का सात अरब 12 करोड़ रूपए का कर्ज़ माफ़ कर दिया जाएगा.
प्रधानमंत्री ने प्रभावित परिवारों को तत्काल मदद देने के लिए विदर्भ क्षेत्र के सभी छह ज़िलाधिकारियों को 50-50 लाख रूपए देने की भी घोषणा की थी.
इस राहत पैकेज को विदर्भ क्षेत्र के छह ज़िलों अमरावती, वर्धा, अकोला, वाशिम, बुलधाना और यावतमाल में इस्तेमाल किया जाना है.