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बुधवार, 12 जुलाई, 2006 को 04:01 GMT तक के समाचार

आशुतोष चतुर्वेदी
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

मुंबई धमाकों की ख़बरों से भरे अख़बार

भारत के सभी अख़बारों का पहला पन्ना मुंबई में हुए सिलसिलेवार धमाकों संबंधी ख़बरों से भरा हुआ है.

इंडियन एक्सप्रेस ने बैनर हेडलाइन लगाई है 'भयानक मंगलवार'. अख़बार ने विस्फोट से मरनेवाले कुछ लोगों की तस्वीरें छापीं हैं और मुंबई विस्फोटों को 7/11 का नाम दिया है.

हिंदुस्तान का शीर्षक है- फिर दहली मुंबई. अख़बार लिखता है कि देश की वाणिज्यिक राजधानी मुंबई में मंगलवार को 1993 के सिलसिलेवार धमाकों की याद ताज़ा हो गई.

नवभारत टाइम्स ने शीर्षक लगाया है- मुंबई में फिर सीरियल ब्लास्ट, 150 की मौत. अख़बार लिखता है कि मुंबई के ये धमाके शेयर बाज़ार को हिला सकते हैं.

अख़बार ने सलाह दी है कि कमज़ोर दिलवाले बुधवार को शेयर बाज़ार की ओर न देखें.

दैनिक जागरण की सुर्खी है- आंतरिक सुरक्षा हाशिए पर. समाचारपत्र का कहना है कि चरमपंथ से अपने बलबूते लड़ने के सरकारी दावों की मंगलवार को धज्जियाँ उड़ गईं.

अख़बार का लिखता है कि पोटा हटानेवाली सरकार के गृह मंत्री शिवराज पाटिल के पास प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का संदेश व्यक्त करने के अलावा और कुछ नहीं था.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने दो शब्दों की हेडलाइन लगाई है-मुंबई अटैक्ड यानी मुंबई पर हमला.

अख़बार ने खुफ़िया सूत्रों के हवाले से लिखा है कि घटना के पीछे लश्कर की कार्यप्रणाली लगती है.

हिंदुस्तान टाइम्स का कहना है कि ये हमला उन लोगों पर है जो ग्लोबल मुंबई का प्रतिनिधित्व करते हैं.

इकॉनामिक टाइम्स ने शीर्षक लगाया है- सलाम बोंबे. अख़बार ने मुंबई की हार न मानने की क्षमता का उल्लेख किया है और लिखा है कि मुंबईवासियों ने 1993 में भी इसका सामना किया था और अब वो दोबारा ये कर रहे हैं.

बिज़नेस स्टैंडर्ड लिखता है कि 1993 का भूत एक बार फिर मुंबई लौटा.