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रविवार, 09 जुलाई, 2006 को 18:12 GMT तक के समाचार

अग्नि III के परीक्षण में तकनीकी गड़बड़ी

भारत ने रविवार को परमाणु हथियार ले जाने की क्षमतावाली लंबी दूरी की मिसाइल अग्नि III का परीक्षण किया लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के कारण मिसाइल अपने लक्ष्य को भेदने से पहले ही समुद्र में गिर गई.

रक्षा सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि परीक्षण का पहला चरण सफल रहा लेकिन दूसरे चरण को पूरा करने से पहले ही यह समुद्र में गिर गई.

रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि अग्नि III के परीक्षण के दौरान सामने आई तकनीकी गड़बड़ी की जांच की जाएगी.

संवाद समिति पीटीआई के अनुसार रक्षा मंत्री ने पश्चिम बंगाल के बहरामपुर में संवाददाताओं से कहा है कि तकनीक गड़बड़ी की जांच की जाएगी और दोष सुधारा जाएगा.

मिसाइल की मारक क्षमता 3500 किलोमीटर तक है और यह शंघाई और बीजिंग तक मार कर सकती है.

सूत्रों के अनुसार मिसाइल आकाश में 12 किलोमीटर तक ऊपर गया जिसके बाद तकनीकी गड़बड़ी सामने आई. सूत्रों के अनुसार मिसाइल के डिजाइन के कारण यह गड़बड़ी उत्पन्न हुई है.

हालांकि मिसाइल परीक्षण करने वाली संस्था रक्षा शोध एवं विकास संगठन ( डीआरडीओ) के प्रवक्ता ने कहा है कि " मिसाइल का परीक्षण" सफल रहा है.

डीआरडीओ के सूत्रों का कहना है कि एक दो दिन में परीक्षण के बारे में सारे विवरण सामने आ जाएंगे.

अग्नि III मिसाइल का यह पहला परीक्षण है. इससे पहले एक बार तकनीकी कारणों से और एक बार अन्य कारणों से अग्नि III का परीक्षण टाला गया है.

मिसाइल कार्यक्रम

ग़ौरतलब है कि भारत ने अग्नि-1 और अग्नि-2 मिसाइलों को सेना में शामिल कर लिया है.

इसके पहले भारत कम दूरी तक मार करने वाले और परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता वाले 'अग्नि-2' का सफल परीक्षण कर चुका है.

अग्नि-2 की मारक क्षमता 2000 से 2500 किलोमीटर तक है.

भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संस्थान ने 1983 में मिसाइलों के विकास का एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया था जिसके तहत पाँच मिसाइलों का विकास किया जा रहा है.

अग्नि श्रृंखला की पहली मिसाइल का परीक्षण 22 मई 1989 को किया गया था.

अग्नि श्रृंखला के अलावा चार अन्य मिसाइलों के नाम हैं - पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल और नाग.

पृथ्वी सतह-से-सतह तक मार करनेवाली कम दूरी की मिसाइल है. आकाश और त्रिशूल सतह-से-हवा में मार करनेवाली मिसाइलें हैं और नाग टैंकरोधी मिसाइल है.