http://www.bbcchindi.com

रविवार, 09 जुलाई, 2006 को 23:19 GMT तक के समाचार

काबुल में आयोजित हुआ फ़ैशन शो

अफ़गानिस्तान में दशकों बाद पहली बार फ़ैशन शो का आयोजन किया गया जिसमें मॉडलों ने काबुल के एक होटल में कई डिज़ाइनरों के बनाए कपड़ों का प्रदर्शन किया.

इस शो को देखने वालों में धनी अफ़गानों समेत ऐसे लोग शामिल थे जो संघर्ष के दौरान अफ़गानिस्तान छोड़कर चले गए थे.

अफ़गानिस्तान की मिलों में बने कपड़ों का प्रदर्शन कई गैर अफ़गान महिलाओं ने किया. इन कपड़ों में फैशन के अनुरुप बने बुर्के भी थे.

आयोजकों का कहना था कि वो मॉडलों के तौर पर मुस्लिम महिलाओं को आगे लाकर किसी विवाद में पड़ना नहीं चाहते थे.

1990 के दशक की शुरआत से लेकर 2001 तक अफ़गानिस्तान पर तालेबान का शासन रहा था जिस दौरान महिलाओं पर कई तरह की पाबंदियां लगी हुई थीं.

अब तालेबान के पतन के क़रीब पांच वर्षों बाद भी देश की महिलाएं खुद को बुर्के में छुपाकर चलने में ही सुरक्षित महसूस करती हैं.

संतुलन

इस शो का आयोजन करने वालों में से एक डिज़ाइनर इसाबेला घिडोनी ने संवाददाताओं से कहा कि शो देखने के लिए कई अफगान महिलाओं को आमंत्रित किया गया था लेकिन उन महिलाओं को नहीं जो मॉडल बनना चाहती थीं.

प्रदर्शित कपड़ों में अधिकतर कपड़े ऐसे थे जो महिलाओं के पूरे शरीर को ढंकते हों.

शो देखने वालों में से एक महिला नूरिया फरहाद का कहना था " मेरे ख्याल से अगर शो में अफगान मॉडल होतीं तो इसका प्रभाव अधिक पड़ता.भविष्य में ऐसा हुआ तो बेहतर होगा."

हालांकि नूरिया ने माना कि अफ़गानिस्तान में अभी भी कम ही ऐसे परिवार हैं जो अपने घर की लड़कियों को मॉडलिंग के पेशे में भेजने के इच्छुक हैं.

शो की आयोजकों में से एक घिटोनी अपने अफगानिस्तान की पार्टनर जुलैखा शेरज़ाद के साथ मिलकर कपड़े और ज्वेलरी डिज़ाइन करती हैं और उन्हें काबुल की दुकानों को बेचती हैं.

शेरज़ाद बताती हैं कि 70 के दशक में युद्ध शुरु होने से पहले काबुल में छोटे पैमाने पर फैशन शो का आयोजन किया जाता था.

शेरज़ाद के अनुसार अफ़गानिस्तान में भी लोगों को फैशन से लगाव है लेकिन यह फैशन पश्चिमी देशों जैसा नहीं है. लोग अपने घरों में और अपने परिचितों के बीच सुंदर दिखना चाहते हैं और फैशन के बारे में यह सोच अलग तरह की है.