शुक्रवार, 07 जुलाई, 2006 को 12:27 GMT तक के समाचार
दिल्ली हाई कोर्ट ने डॉक्टर वेणुगोपाल को एम्स यानी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक पद से बर्ख़ास्त करने के संचालन समिति के फ़ैसले पर रोक लगा दी है.
शुक्रवार को डॉक्टर वेणुगोपाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने उनकी बर्ख़ास्तगी पर अगली सुनवाई होने तक रोक लगा दी है. इस मामले में 17 अगस्त को अगली सुनवाई होनी है.
न्यायालय ने केंद्र सरकार, स्वास्थ्य मंत्रालय, चुनाव आयोग और एम्स की संचालन समिति को नोटिस भी जारी किया है. जिसका जवाब उन्हें दो सप्ताह के अंदर देना है.
इसके अलावा डॉक्टर वेणुगोपाल को भी दो हफ़्ते में अपना शपथ-पत्र पेश करने के लिए कहा गया है.
बुधवार को एम्स की संचालन समिति ने एक प्रस्ताव पारित करते हुए डॉक्टर वेणुगोपाल को एम्स के निदेशक पद से बर्ख़ास्त कर दिया था.
उनकी बर्ख़ास्तगी की घोषणा के बाद एम्स के जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया था जिससे मरीज़ों को काफ़ी परेशानी उठानी पड़ीं.
डॉक्टर वेणुगोपाल ने संचालन समिति के इस फ़ैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनोती दी थी.
आरोप-प्रत्यारोप
उन्होंने इस फ़ैसले को ग़लत ठहराते हुए अपनी याचिका में कहा कि एम्स जैसे संस्थान को राजनीति और सरकार के प्रभाव से मुक्त रखना चाहिए और इन्हें एक स्वायत्त संस्थान के रूप में काम करने देना चाहिए.
याचिका में यह भी कहा गया है कि एम्स की संचालन समिति के अध्यक्ष का पद एक लाभ का पद है और केंद्रीय मंत्री इस पद पर बने हुए हैं.
संचालन समिति के अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदॉस का आरोप था कि वेणुगोपाल ने आचार संहिता का उल्लंघन किया है जिसके कारण संस्थान में अनुशासनहीनता की स्थिति पैदा हो गई और इसलिए उन्हें पद से हटा दिया जाना चाहिए.
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी आरोप लगाया था कि वेणुगोपाल ने आरक्षण विरोधी आंदोलन को बढ़ावा दिया था और सार्वजनिक रूप से केंद्र सरकार की आलोचना की थी.
हालाँकि पारित प्रस्ताव को नियुक्तियों के लिए बनी मंत्रिमंडलीय समिति के पास अनुमोदन के लिए भेज दिया गया था पर इस प्रस्ताव के अनुसार डॉक्टर वेणुगोपाल को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया था.